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जेएनयू में 'बापसा' की धमक से बेनकाब होता लेफ्ट का जनेऊ कनेक्शन

Created By : भवेंद्र प्रकाश Date : 2016-12-28 Time : 16:40:11 PM


जेएनयू में 'बापसा' की धमक से बेनकाब होता लेफ्ट का जनेऊ कनेक्शन

जेएनयू में दलित, पिछड़े, मुस्लिम और आदिवासी छात्रों से घबराई सरकार ने इनमें से 15 को निष्काषित कर दिया है। दरअसल वैचारिक विविधता के लिए पहचाने जाने वाले जेएनयू में लेफ्ट का बोलबाला रहता है। अकसर यहां हर मुद्दे पर डिबेट्स होती हैं। यहां के लेफ्ट को जन सरोकार की बातें करने वाला माना जाता रहा है। 


ये लोग बिरसा की बात करते हैं, अंबेडकर की बात करते हैं लेकिन एक नए संगठन बिरसा अंबेडकर फूले स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (बापसा) ने इनकी कथनी और करनी की पोल खोल दी। इस संगठन के सामने आने के बाद यहां की लाल दीवारों के बीच पनप रहा जातिवाद का स्याह सच सामने आया। बापसा ने छात्रसंघ इलेक्शन में भी लेफ्ट के दो धड़ों को एक साथ आने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन अब उनका जनेऊ कनेक्शन बिल्कुल ही सामने रख दिया है। 

 

इस समय JNU के दलित, ओबीसी छात्र दो तरफ़ा लड़ाई लड़ रहे हैं। एक तरफ JNU VC और प्रशासन जो संघ के इशारे पर चल रहा है। यह खुले मैदान में लड़ाई है। दूसरी तरफ वे JNUSU, AISA, SFI, BASO, DSF जैसे लेफ्ट संगठनो से भी लड़ रहे हैं। 

 

दरअसल यहां एंट्रेंस के लिए 70 अंक का रिटेन और 30 अंक का वायवा होता है। पिछला रिकॉर्ड रहा है कि यहां वायवा में अंकों को लेकर बहुजन छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है। वे रिटेन में अच्छे नंबरों की बदौलत ही यहां आ पाते हैं। वहीं यहां के सवर्ण प्रोफेसर्स का दल अन्य छात्रों को ज्यादा नंबर देता है। इसके बावजूद भी यहां दलित, पिछड़े, आदिवासी और माइनॉरिटी छात्रों की संख्या अन्य विश्वविद्यालयों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। यही यहां के प्रसाशन की आँखों की किरकिरी बना हुआ है। 


ये छात्र वाइवा में हो रहे अन्याय के विरोध में आवाज उठा रहे थे। इनकी मांग थी कि वाइवा को 30 से घटाकर 10 अंकों का किया जाए। इस पर विचार करने के लिए प्रसाशन ने एक मीटिंग बुलाई। इसमें JNUSU प्रेसिडेंट मोहित पांडे भी शामिल हुए। इस मीटिंग के मंथन में जो फल निकला वह पूरी तरह से ही सबको भौंचक कर देने वाला है। 


मीटिंग में तय हुआ कि सारा एडमिशन को लेकर है, इसमें रिटेन को ही निष्प्रभावी कर दिया जाए। यानि सारी पहल हाशिये के छात्रों के लिए जेएनयू के रास्ते बंद करने के पक्ष में तय हो गई। 


इस मंथन के बाद जेएनयू में एक और चीज जोड़ने की कोशिश हो रही है कि दाखिला लिखित परीक्षा का नंबर जोड़े बगैर केवल इंटरव्यू के आधार पर हो ( लिखित बस इंटरव्यू में जाने के लिए हो)। जाहिर यह और खतरनाक है। जेएनयू में ऐसी कोशिशों का विरोध कर रहे और इंटरव्यू/वाइवा के नंबर 30 से घटाकर 10 किए जाने की मांग कर रहे छात्र इसी विरोध के कारण प्रसाशन के रडार पर आ गए और कर डाली इन वर्गों को फिर से शिक्षा से वंचित करने की जाहिल कोशिश। 

 

लेखक नेशनल दस्तक के वेब एडिटर हैं, ये उनके निजी विचार है।

bhavenpr@gmail.com- 08744995542

 

 


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