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पंजाब में सत्ता की चाबी दलितों के हाथ

Created By : नेशनल दस्तक ब्यूरो Date : 2017-01-11 Time : 16:31:33 PM


पंजाब में सत्ता की चाबी दलितों के हाथ

चंडीगढ़। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। अगर यूपी और पंजाब विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो दोनों ही राज्यों में दलित वोटरों की भूमिका अहम है। यूपी में करीब 22 फीसदी तो पंजाब में करीब 34 फीसदी दलित वोटर हैं। अगर पंजाब की बात करें तो यहां दलित वोटर अलग-अलग वर्गों में बंटा हुआ नजर आता है। यहां दलित पूरी तरह कभी किसी पार्टी के साथ नहीं रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दलितों की स्थिति भी अलग-अलग है इसलिए पूरे राज्य में दलित वोटर कभी एकतरफा नहीं रहे।

 

पढ़ें-तमिलनाडु- सवर्णों के गांव में दलितों ने खुलवाए मंदिर के दरवाजे


दिलचस्प बात यह है कि पंजाब में दलितों का इतना बड़ा वर्ग होने के बावजूद यहां दलित नेताओं को बड़े पद कम ही मिले हैं। चुनाव के दौरान सभी पार्टियां इन्हें अपने-अपने तरीके से लुभाने में लगी रहती हैं। पंजाब में ग्रामीण इलाके में रहने वाले दलित वोटरों का एक बड़ा हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में चुनाव के वक्त ये डेरे भी अहम भूमिका निभाते हैं। पंजाब में दलित वोटर कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के बीच बंटता रहा है।

 

 

पंजाब में दलितों के सामाजिक-आर्थिक सूचकांक के कुछ विचलित करने वाले पहलू भी हैं। यहां ग़रीबों की कुल जनसंख्या का करीब आधा हिस्सा दलितों का है और दूसरी जातियों के मुक़ाबले यह बढ़ता ही जा रहा है। दलितों के विकास के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रमों का बजट हर साल बढ़ाने के बावजूद इनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई ख़ास सुधार नहीं हुआ है।


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