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रमन सरकार में जिस महिला के गुप्तांग में पुलिस ने भरा था पत्थर, उसी को सजा दिलाने पर तुली सरकार

Created By : अंकित राज Date : 2017-04-21 Time : 10:34:03 AM


रमन सरकार में जिस महिला के गुप्तांग में पुलिस ने भरा था पत्थर, उसी को सजा दिलाने पर तुली सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने समाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और हिमांशु कुमार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को ख़ारिज करने की मांग की है। यह याचिक सोनी सोनी को जेल में प्रताड़ित करने और 2009 में 16 आदिवासियों की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग के लिए दायर की गई थी।

 

सरकारी पक्ष ने यह दलील दी है कि अगर इस याचिका पर सुनवाई हुई तो नक्सलवाद से लड़ रहे सुरक्षाबलों का मनोबल गिरेगा। द वायर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक...  

 

छत्तीसगढ़ की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरूण मिश्रा और एमएम शान्तनागौडर की बेंच के सामने कहा है कि सोनी सोरी और हिमांशु कुमार द्वारा 2009 में राज्य में हुए कथित क़त्लेआम के लिए सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका महज़ नक्सलियों की मदद करने का एजेंडा है।   

 

 

सरकारी पक्ष ने अदालत से मांग की है कि ऐसी याचिका और याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सरकार राष्ट्रहित में फ़ैसले ले, ताकि अदालत की दीनता का कोई भी दुरुपयोग न करे। सुरक्षाबलों पर झूठी कहानी बनाकर याचिका दायर करना नक्सलियों को मदद करना है। यह सुरक्षाबलों और उनके प्रयासों का मनोबल गिराना है।

 

अदालत की बेंच ने हलफ़नामा स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई चार हफ़्ते बाद रखी है। अदालत ने सोनी सोरी और हिमांशु कुमार से भी कहा है कि यदि वे कोई प्रतिवाद दर्ज कराना चाहें तो दायर कर सकते हैं।

 

सरकार ने अपने हलफ़नामा में यह भी कहा है कि, ‘सच्चाई विवादित नहीं हो सकती और वास्तव में विवादित नहीं है। यह स्पष्ट रूप से पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक तुच्छ याचिका दायर करके क़ानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।’ राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं की मांग के मुताबिक पहले से मुआवज़े का भुगतान किया जा चुका है।

 

 

गौरतलब है कि हिमांशु और सोनी ने याचिकाएं दायर करके आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बहाने आदिवासियों की हत्या की जा रही है। एक याचिका में आरोप है कि 2009 में दंतेवाड़ा ज़िले के एक गांव में हुए क़त्लेआम में विशेष पुलिस अधिकारी और अन्य सुरक्षाबल के जवान शामिल थे।

 

इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार का कहना है, ‘छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से दो याचिकाएं खारिज करने, सोनी सोरी व मुझपर ज़ुर्माना लगाने के लिए कहा है। पहली याचिका सोनी सोरी की है जिसमें उन्होंने थाने में अपने गुप्तांगों में पुलिस अधीक्षक द्वारा पत्थर भरने के ख़िलाफ़ दायर की थी।

 

 

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोनी सोरी की मेडिकल कॉलेज में जांच कराई थी जिसमें सोनी सोरी के शरीर से पत्थर के टुकड़े निकले थे, इसके बावजूद सरकार सोनी की इस याचिका को झूठा कह रही है।’

 

हिमांशु के मुताबिक, ‘दूसरी याचिका मेरी है। सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन ने छत्तीसगढ़ के गोमपाड गांव में 2009 में सोलह आदिवासियों की हत्या की थी। गांव वाले मेरे पास मदद मांगने आए, दिल्ली और रायपुर से कई साथी इस मामले की जांच करने गए, हमने सैंकड़ों आदिवासियों से बात की, सभी ने घटना की पुष्टि की।

 

 

बारह आदिवासी मेरे साथ दिल्ली आए और प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने पूरे हत्याकांड का वर्णन किया। सुप्रीम कोर्ट में बारह आदिवासियों के साथ मैंने याचिका दायर की। इसके बाद जब हम छत्तीसगढ़ लौटे तो सरकार ने मेरी हत्या की योजना बनाई और मुझे छत्तीसगढ़ छोड़ना पड़ा।

 

उन सभी आदिवासियों को गायब कर दिया गया और बाद में उनसे दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में बयान दर्ज़ करवाया गया। बयान के बाद पुलिस ने उन सभी को फिर से गायब कर दिया। इस मुक़दमे में अब सिर्फ़ मैं बचा हूं जो कोर्ट पहुंच सकता हूं।’

 

छत्तीसगढ़ सरकार के पक्ष पर सवाल उठाते हुए हिमांशु कहते हैं, ‘सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि हिमांशु कुमार ने यह मामला नक्सलियों को मदद पहुंचाने के लिए और सुरक्षाबलों का मनोबल कम करने के लिए दायर किया है।

 

इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास भारत का कोई नागरिक मदद मांगने आता है तो आप उसकी मदद ना करें। न्याय मांगने और अदालत में जाने से किसी का मनोबल कैसे कम हो जाता है? अगर मुक़दमा झूठा होगा तो अदालत अंधी तो है नहीं जो सैनिकों को सज़ा दे देगी? मेरी याचिका के बाद भी बस्तर में सैनिक लगातार बलात्कार और निर्दोष आदिवासियों की हत्याएं कर रहे हैं।

 

काश मनोबल का इस्तेमाल संविधान और नागरिकों को बचाने में होता। लेकिन मनोबल का इस्तेमाल पूंजीपतियों के लिए ज़मीनों पर कब्ज़े के लिए आदिवासियों को डराने और उन पर ज़ुल्म करने के लिए किया जा रहा है।’


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