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आईपीएल पर पड़ी नोटबंदी की मार, नहीं मिला स्पॉन्सर

Created By : नेशनल दस्तक ब्यूरो Date : 2017-02-15 Time : 12:19:11 PM


आईपीएल पर पड़ी नोटबंदी की मार, नहीं मिला स्पॉन्सर

नई दिल्ली। नोटबंदी की मार झेल रही आम जनता के साथ-साथ कॉरपोरेट जगत पर इसका असर अब भी जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान करते वक्त हालात सामान्य होने के लिए 50 दिन का वक्त मांगा था, मगर नोटबंदी के 3 महीने बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए है। 

 

नोटबंदी के मार से देश का सबसे बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट आईपीएल भी अच्छुता नहीं रहा। आईपीएल के दसवें सीजन के आयोजन की तैयारी कर रहा बोर्ड ऑफ क्रिकेट कंट्रोल इन इंडिया यानि बीसीसीआई को तब बड़ा झटका लगा जब उसे अपने इस विश्व प्रसिद्ध टूर्नामेंट के लिए कोई बड़ी स्पॉन्सरशिप या मार्केटिंग डील नहीं मिली।

 

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दरअसल इस टूर्नामेंट की स्पॉन्सरशिप या मार्केटिंग करने के लिए कंपनियां फरवरी माह से ही डील्स की घोषणा करने लगती है। लेकिन इस बार टूर्नामेंट को लेकर मार्केटिंग से जुड़ी हलचल न के बराबर है। अभी तक किसी बड़ी स्पॉन्सरशिप या मार्केटिंग की डील की घोषणा नहीं हुई है। 

 

पिछले वर्ष आईपीएल ने लगभग 2,500 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया था। इसमें ऐड सेल्स और स्पॉन्सरशिप शामिल थी। ब्रॉडकास्ट राइट्स होल्डर सोनी पिक्चर्स को ऐड सेल्स से करीब 1,100 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी।

 

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ऐड एजेंसी देंत्सु एजिस नेटवर्क के चेयरमैन आशीष भसीन ने कहा, 'बीसीसीआई खुद मुश्किल में है और इससे आईपीएल की मार्केटिंग पर भी असर पड़ा है। इसके साथ ही नोटबंदी के कारण कंपनियां भी खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गई हैं।'


मैडिसन वर्ल्ड के चेयरमैन सैम बलसारा ने बताया, 'जनरल मूड फीका दिख रहा है। हम अभी भी नोटबंदी के असर से उबर रहे हैं और लोग बड़े वादे करने से बच रहे हैं। मजबूत ग्रोथ रेट वापस हासिल करने में कुछ महीनों का समय लगेगा। बीसीसीआई के संकट का भी असर पड़ा है क्योंकि जो हो रहा है, वह गंभीर मामला है।'


आईपीएल में विज्ञापन देने वालों में बेवरेजेज इंडस्ट्री का बड़ा योगदान रहता है क्योंकि यह टूर्नामेंट गर्मी के समय में होता है। बेवरेजेज इंडस्ट्री के एक एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'अभी तक मार्केटिंग की रफ्तार काफी कम है। हमने अभी तक अपना प्लान फाइनल नहीं किया है।'

 


बीसीसीआई ने 2018 से आगे के लिए टेलिविजन और डिजिटल राइट्स के लिए टेंडर दिया है और इससे 18,000-30,000 करोड़ रुपये के बीच रेवेन्यू मिलने का अनुमान है। 

 

वहीं दूसरी ओर लोढ़ा कमिटी ने बीसीसीआई के अधिकतर पदाधिकारियों को टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अयोग्य करार दे दिया है जिस कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई है।

 


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