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विवादित बयान के बाद स्नैपचैट की लोकप्रियता में हुई गिरावट, यूजर्स ने किया अनस्टॉल

Created By : नेशनल दस्तक Date : 2017-04-17 Time : 12:25:31 PM


विवादित बयान के बाद स्नैपचैट की लोकप्रियता में हुई गिरावट, यूजर्स ने किया अनस्टॉल

नई दिल्ली। भारत में ज्यादातर लोग आज बढ़चढ़ कर सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे हैं। हाल ही में स्नैपचैट के सीईओ इवान स्पीगल के भारत जैसे ‘गरीब देश’ में वाले बयान को लेकर उन्हें इसकी कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है। इसका असर अब व्यापार पर भी होने लगा है।

 

बता दें कि इतना ही नहीं ऐप स्टोर पर ‘पांच स्टार’ की लोकप्रियता वाले स्नैपचैट ऐप की रेटिंग ‘एक स्टार’ पर आ गई है। ऐप स्टोर के ऐप इनफो में मिली जानकारी की अनुसार रविवार को इस ऐप की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट सामने आई है।

 

वहीं, अमेरिका की एक न्यूज वेबसाइट वैरायटी के अनुसार, शनिवार को स्नैपचैट के पुराने कर्मचारी एंटोनियो पोमपिआनो कह रहे थे कि कंपनी के सीईओ इवान स्पीगेल ने सितंबर 2015 में कहा था, “यह एप केवल अमीर लोगों के लिए है। मैं इसे गरीब देशों जैसे भारत और स्पेन में नहीं ले जाना चाहता।”

 

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ये था मामला

2015 में एक बैठक के दौरान कंपनी के कर्मचारी एंथनी पॉन्पिलानों ने जब भारत जैसे बाजार में ऐप के धीमे विकास के बारे में चिंता जताई तो स्पीगल कर्मचारी को बीच में ही काटते हुए कहा कि, 'ये ऐप केवल अमीर लोगों के लिए है'। वैराइटी ने कर्मचारी के हवाले से ये भी बताया कि स्पीगल ने कहा 'मैं भारत और स्पेन जैसे गरीब देशों में विस्तार नहीं करना चाहता हूं'।

 

ये बात तब सामने आई जब एंथोनी पांप्लिआना नाम के कर्मचारी ने LA डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में स्नैपचैट के खिलाफ मुकदमा दायर किया। अनुमानों के अनुसार भारत में स्नैपचैट के करीब 40 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं। हालांकि एंथनी ने आरोप लगाया है कि 2015 में स्नैपचैट का आईपीओ आने से पहले कंपनी की ग्रोथ के बारे में कई गलत जानकारियां दी गई थी। आईपीओ के लेकर हुई बैठक में ही स्पीगल ने भारत और स्पेन को गरीब देश बताया था।

 

यह खुलासा होने के बाद भारत में लोगों ने धड़ाधड़ इसे अनस्टॉल करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने ऐप स्टोर पर सीईओ की आलोचना करते हुए लिखा, “पहले तो मैं इस ऐप को कोई खराब स्टार भी नहीं देना चाहता। स्नैपचैट के सीईओ इवान बताते हैं कि वह कितने मूर्ख हैं। मैं मानता हूं कि इस कंपनी का तीन-चौथाई हिस्सा भारतीय कर्मचारियों से चल रहा है। यदि वह गरीब देशों में इसका विस्तार नहीं करना चाहते, तब यह ऐप फ्री क्यों है? वह क्यों नहीं इस पर कोई फीस लेते?”

 

एक यूजर ने लिखा #Snapchat, जित्ता तुम्हारा बजट है। उतने तो हमारे साहेब कपड़े पहन कर फेंक देते है।

 

संपादन- भवेंद्र प्रकाश

 


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