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नोटबंदी पर उर्जित पटेल जवाब नहीं दे पाए तो मोदी को तलब करेगी लोक लेखा समिति

Created By : नेशनल दस्तक ब्यूरो Date : 2017-01-09 Time : 15:07:44 PM


नोटबंदी पर उर्जित पटेल जवाब नहीं दे पाए तो मोदी को तलब करेगी लोक लेखा समिति

नई दिल्ली। नोटबंदी के फैसले की समीक्षा के लिए संसद की लोक लेखा समिति ने वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों समेत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल को 28 जनवरी को अपने समक्ष पेश होने के लिए तलब किया है, लेकिन अब इस मामले में नया मोड सामने आ गया है। अगर रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं तो लोक लेखा समिति पीएम मोदी को तलब कर सकती है। समिति ने वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के गवर्नर को नोटबंदी को लेकर विस्तृत प्रश्नावली भेजी है। 


आपको बता दें कि संसद की लोकलेखा समिति ने नोटबंदी को लेकर 20 जनवरी को बैठक बुलाई है। इस बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल, वित्त सचिव अशोक लवासा और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास को उपस्थित होना है। पीएसी के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता केवी थॉमस ने कहा, 'हमने जो सवाल उन्हें भेजे थे उनका अभी जवाब नहीं मिला है। वे 20 जनवरी की बैठक से कुछ दिन पहले जवाब भेजेंगे। जो जवाब मिलेंगे उन पर विस्तार से चर्चा होगी।'

 

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यह पूछे जाने पर कि जवाब यदि संतोषजनक नहीं हुए तो क्या पीएसी प्रधानमंत्री को बुला सकती है। थॉमस ने कहा, 'समिति को मामले में शामिल किसी को भी बुलाने का अधिकार है। हालांकि, यह 20 जनवरी की बैठक के परिणाम पर निर्भर करता है। अगर सभी सदस्य सर्वसम्मति से तय करते हैं तो हम नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को भी बुला सकते हैं।'

 

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थॉमस ने कहा कि आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे मिला था तब उन्होंने कहा था कि 50 दिन बाद दिसंबर अंत में स्थिति सामान्य हो जायेगी, लेकिन ऐसा नहीं दिखता है।' पीएसी अध्यक्ष ने कहा कि इसलिए समिति ने नोटबंदी के फैसले की प्रक्रिया में शामिल वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को अपने समक्ष बुलाया है।

 

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थॉमस ने कहा, 'प्रधानमंत्री अपने अहम के लिये देश को भ्रमित कर रहे हैं। वह अपने गलत निर्णय को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2,000 रुपये का नोट जारी कर बड़ी ही संवेदनहीनता के साथ यह कदम उठाया।' थॉमस ने सवाल उठाया, 'ऐसे देश में जहां कॉल ड्रॉप की समस्या है और दूरसंचार सुविधाएं ठीक से नहीं चल रही हैं, प्रधानमंत्री किस प्रकार यह उम्मीद कर सकते हैं कि मोबाइल फोन पर ई-लेनदेन हो सकेगा। क्या हमारे पास इसके लिये उपयुक्त ढांचागत सुविधाएं हैं?'

 

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गौरतलब है कि लोक लेखा समिति ने नोटबंदी के इस अहम मुद्दे पर खुद ही संज्ञान लिया है। लोक लेखा समिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट की जांच-परख करती है।

 


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