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इस बार भाजपा सरकार को उखाड़ कर दामोदर में नहीं डुबो सकी तो इतिहास बन जाएगी 'झामुमो'

Created By : विनोद कुमार Date : 2017-04-21 Time : 12:42:56 PM


इस बार भाजपा सरकार को उखाड़ कर दामोदर में नहीं डुबो सकी तो इतिहास बन जाएगी 'झामुमो'

दो वर्ष बाद होने वाला झारखंड विधानसभा चुनाव झामुमो के लिए आखिरी मौका होगा। इस बार वह नहीं उबर पायी और भाजपा सरकार को उखाड़ कर दामोदर में डुबो नहीं सकी, तो फिर शायद कभी नहीं। लिट्टीपाड़ा चुनाव में आदिवासी जनता ने उस पर अपार भरोसा कर यह मौका दिया है। 


आदिवासी जनता ने न सिर्फ भाजपा की साजिशों को नाकाम किया, बल्कि बाबूलाल और हेमलाल जैसे आदिवासी नेताओं को भी यह संदेश दिया कि अपने निहित स्वार्थों के लिए भाजपा का टूल मत बनिये। कर सकते हैं तो भाजपा के खिलाफ गोलबंदी को मजबूत कीजिये।


लिट्टीपाड़ा झामुमो की परंपरागत सीट थी। बावजूद इसके भाजपा की साजिशों की वजह से हालात झामुमो के लिए कठिन थे। उसने झामुमो के ही एक स्थानीय नेता को अपना प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने बाबूलाल को प्रेरित किया कि वे अपना प्रत्याशी वहां से खड़ा कर आदिवासी वोटों को बांटे। वह यूपी चुनाव की अपार सफलता से आत्मविश्वास से लबरेज थी। 

 

 

मोदी की सभा करायी गई। मोबाईल और नियुक्ति पत्र बांटा गया, बावजूद इसके रधुवर दास और मोदी चुनाव हार गये। और अब वे कह रहे हैं कि झामुमो को संथालपरगना से उखाड़ फेंको।


तो, झामुमो को इस चुनौती को स्वीकार करना होगा। लेकिन इसके पहले यह सुनिश्चित करना होगा और समझ बनानी होगी कि यह जीत सिर्फ गुरुजी की या झामुमो की जीत नहीं। दरअसल, आदिवासी जनता भाजपा के शासन के खतरे को भांप चुकी है। 

 

वह यह महसूस करने लगी है कि भाजपा का सत्ता में रहना आदिवासियों के अस्तित्व के लिए खतरनाक है। और झामुमो को भाजपा विरोधी इस राजनीतिक मन:स्थिति को ध्यान में रख बड़ी राजनीतिक भूमिका के लिए तैयार होना होगा।

 


जनता को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि वह किसी कीमत पर भाजपा के साथ अब नहीं जायेगी।


भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति का वह डट कर मुकाबला करेगी और किसी कीमत पर झारखंड को गुजरात नहीं बनने देगी।


वह सीएनटी, एसपीटी एक्ट को बचाने के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेगी।


वह झारखंड की जल,जंगल, जमीन को बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।


वह एक बार फिर से आदिवासी, सदान, अल्पसंख्यक एकता को बनाने का प्रयास करेगी।


वह सिर्फ राजनीति नहीं करेगी, जन संघर्षों के साथ खड़ी होगी।


यदि वह ऐसा करती है तो बचेगी, वरना इतिहास की वस्तु बन जायेगी।

 

(विनोद कुमार लेखक व पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

संपादन- भवेंद्र प्रकाश


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