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गाय माताओं के नाम एक किसान का खुला खत

Created By : ओम प्रकाश Date : 2017-01-04 Time : 11:34:02 AM


गाय माताओं के नाम एक किसान का खुला खत

प्रिय गाय माताओं हैप्पी न्यू इयर, कैसी हैं आप?


देख लिया न! पिछले 50 दिनों में आपकी ख़बर किसने ली। किस अख़बार में आप हेडलाइन बनीं और किस टीवी चैनल की ब्रेकिंग न्यूज़। दूर-दूर तक आपका अता-पता नहीं। गौशालाओं में आप ठीक तरह से रह रही हैं न। कोई दिक्क़त तो नहीं है। जाड़े के दिनों में आपके लिए बोरे पल्ली की व्यवस्था है न। जयपुर की हिंगोनिया गौशाला वाली माताओं आपके क्या हाल हैं? ठंड से आपके पैर तो नहीं जकड़ रहे हैं। वहां पर आपका ख्याल रखा जा रहा है न। हिंगोनिया की माताओं आपकी याद इसलिए आई बीते अगस्त में आपकी सैकड़ों बहनों में दम तोड़ दिया था। 


दरअसल जो मंत्री संतरी आपके हक की बात करते हैं सच में यही आपको पालते नहीं। आपकी जगह सरकारी कोठियों में तरह-तरह की किस्म वाले कुत्ते पालते हैं। ये आपके संरक्षण की बात करके पालने वालों को आपके ही ख़िलाफ भड़काते हैं। इन्हें इलेक्शन के दौर में आपकी बहुत याद आती है कोई आपका वध न करने पाए इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। 


प्रिय माताओं आप इन्हीं से पूछिएगा पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम में क्या कभी आपको बचाने की हिमायत  की ? (वो मित्र जो मेरी बातों से असहज होकर बाहें समेटने लगे 8 अक्टूबर 2015 का इंडियन एक्सप्रेस अख़बार पढ़ें ये रहा लिंक- 

 

http://indianexpress.com/article/explained/explained-no-beef-nation/

 

प्रिय गाय माताओं! इन राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की घिग्घी बंध जाती है और कभी आपके संरक्षण की बात नहीं करते। पिछले दिनों भारत में गो-कशी नहीं होगी का ढोल पीटा गया, और आपको राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठी। इस पर सरकार ने कितना ध्यान दिया इस हकीक़त से आप भी रूबरू होंगी। मेले और बाज़ारों में आप कौड़ी मोल हो गईं। भाव की तो बात छोड़ो किसी ने पूछा नहीं। यहां तक नौबत ये आ गई लोगों आप सहित आपके बेटों को छोड़ना ही मुनासिब समझा। 

 

कृषि प्रधान देश में किसानों को अपने मवेशियों को उनकी रकम मिले बगैर छोड़ना पड़ा जिसके चलते किसानों की माली हालात बिगड़ी। खैर! हम तो किसान हैं हमारी हालत कभी ठीक नहीं रही। कभी सरकार का वार, तो कभी प्रकृति की मार झेलते आए हैं झेलते रहेंगे। लेकिन गाय माताओं आपकी हालत पहले से और बदतर हो गई। आपको जब से बड़ी संख्या में छोड़ दिया गया आपने हाइवे, सड़क, और गलियारों पर चहलकदमी शुरू कर दी। बेपनाह फसलों को नुकसान पहुंचाने लगीं। 


जिस उत्तर प्रदेश में माँ कहा जाता है उसी प्रदेश के लोगों ने आपको आवारा देखकर पैरों में कीलें ठोंक दीं। गाय के पैरों में कील ठोकने काम झांसी के बबीना में किया गया। ( विश्वास न हो तो आप इंडिया टुडे हिंदी, 26 अक्टूबर 2016 का अंक देख सकते हैं पृष्ठ संख्या 46)  तस्वीर में हमें आपकी दशा देख कर तरस आता है। यही आपकी रक्षा करने वाले लोग निर्दयी हो गए। अब उत्तर प्रदेश में 2017 के विधान सभा चुनाव होने हैं। जहां पर एक बार फिर आपका इस्तेमाल दूध के बजाए वोट के लिए होगा। जो लोग आपको बचाने और हत्या की बात करें उनसे उपर्युक्त सवाल ज़रूर पूछिएगा।

आपका अपना- ओम प्रकाश


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