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यूपी वाले ही बीजेपी को समझा पाएंगे कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती...

Created By : दिनेश कुमार संडीला Date : 2017-01-07 Time : 13:34:50 PM

यूपी वाले ही बीजेपी को समझा पाएंगे कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती...

बचपन से एक मुहावरा सुनते आये हैं कि काठ की हांड़ी केवल एक बार ही चढ़ती है। कुछ लोग इसे इस तरह भी कहते हैं कि काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती है। यह केवल मुहावरा ही नहीं है बल्कि सच्चाई भी है कि लकड़ी की हांड़ी पर दुबारा कुछ नहीं बना सकते हैं। लेकिन बीजेपी की सरकार यह हक़ीक़त मानने को तैयार ही नहीं है। 


2014 में मोदी जी के नाम से लोक सभा का चुनाव जीत लिया कि बार बार सभी राज्यों के चुनाव भी उनके नाम से ही लड़े जा रहे हैं। यह बात अलग है कि उनके नतीजे काठ की हांड़ी वाली कहावत ही सिद्ध करते आये हैं।


अभी 5 राज्यों के चुनावों में भी किसी भी मुख्य मंत्री का नाम घोषित नहीं किया है। अभी भी सभी राज्यों के चुनाव मोदी जी के नाम से लड़े जा रहे हैं। और इन राज्यों के चुनावी नतीजे भी दिल्ली और बिहार के नतीजों से भिन्न नहीं होंगे।


इसमें सबसे महत्वपूर्ण चुनाव उत्तर प्रदेश के हैं। इसके चुनाव परिणामों से देश की राजनीति टिकी हुई है। अगर बीजेपी भूल से भी कुछ सीटें ले गयी तो देश में हाहाकार मच सकता है। भगवाकरण जब बिहार के चुनाव के बाद शांत हो गया था दोबारा से हावी हो सकता है। 


माननीय मोहन भागवत जी ने घर वापसी का इशारा कर दिया है। गोरक्षक जो कल तक बैंकों के आगे लाइनों में लगे थे वो भी अब फुर्सत में हैं।राम मंदिर भी ज्वलंत मुद्दा बन सकता है। और बीजेपी की गिरती हुई साख को ऑक्सीजन देने का काम कर सकता है।


जो लोग नोट बंदी की वजह से बर्बाद हो गए हैं। पैसे पैसे के लिए मोहताज हो गए हैं। जिनके परिवार के लोग बिना पैसे की वजह से इलाज न होने के कारण मर गए। लाइनों में सैकड़ों मर गए। इन सभी पर सही कदम की मोहर लग जाएगी।


आम आदमी के लिये यह कैश लेस स्कीम नहीं है बल्कि पैनी लेस व्यवस्था है। और मोदी जी के मित्रों के घरों में 2000 के नोटों की गड्डियों के अम्बार लगे हैं। और उनके साथ दलाल और अन्य पैसे वालों के घर भी नोटों की गड्डियों से भरे दिखाई देते हैं। जब सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का?

 

बाकि के चार राज्यों में किसी को भी वोट दें कोई ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। लेकिन उत्तर प्रदेश में बीजेपी गलती से भी आ गयी तो इसके परिणाम भयंकर और दूरगामी होंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि उत्तर प्रदेश के लोग बिहार से तो राजनैतिक तौर पर ज्यादा असर रखते हैं। जिस तरह से बिहार के लोगों ने राजनैतिक समझ का परिचय दिया था उसी तरह से उत्तर प्रदेश के लोग भी अपनी परिपक्कव राजनैतिक समझ का परिचय देंगे।

 

(लेखक रिटायर आईआरएस अधिकारी हैं। यह आर्टिकल उनकी फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है।)


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