National Dastak

x

मनुस्मृति ब्राह्मणवाद जाति-वर्ण आधारित विषमतमूलक समाज व्यवस्था का दर्शन

Created By : मुकेश कुमार Date : 2016-12-25 Time : 11:09:02 AM

मनुस्मृति  ब्राह्मणवाद जाति-वर्ण आधारित विषमतमूलक समाज व्यवस्था का दर्शन

आज मनुस्मृति दहन दिवस है। आज ही के दिन 25 दिसंबर 1927 को अपने एक ब्राह्मण मित्र सहस्रबुद्धे के सुझाव पर बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने मनुस्मृति जलाकर ब्राह्मणवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का शंखनाद किया था। ब्राह्मणवाद जाति-वर्ण आधारित विषमतमूलक समाज व्यवस्था का दर्शन है। 


ब्राह्मणवाद दलितों-पिछड़ों-स्त्रियों के शोषण को वैधता दिलाने का दर्शन है और मनुस्मृति इसकी आचार संहिता है। इसे जलाते हुए बाबा साहब ने इस आचार संहिता की वैधता को ही चुनौती प्रदान कर दी थी। धर्म-समाज की जकड़बंदी को कायम रखने में धर्मशास्त्रों व आचार संहिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 


मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के तमाम निर्णायक घड़ी में और लोक व्यवहार में भी इसकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस रूप में ब्राह्मणवाद आज भी जिन्दा है और राष्ट्रीय जीवन को प्रभावित कर रहा है। आज भी वह दलित-बहुजनों-स्त्रियों का खून चूस रहा है। रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या, अख़लाक़-मिन्हाज अंसारी के कत्ल से लेकर नजीब को गायब करने तक में इसकी भूमिका देखी जा सकती है। गुजरात के ऊना में दलितों की हत्या से लेकर देश के हर कोने में दलित उत्पीड़न का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। जिससे यह साबित होता है कि ब्राह्मणवाद आज भी जिन्दा है और इसके खिलाफ लड़ाई की जरूरत आज भी बनी हुई है।


ब्राह्मणवाद के खिलाफ लड़ाई का अर्थ यथास्थितिवादी समाज वयवस्था को बदलने की लड़ाई है। यह दलितों-शोषितों-वंचितों-स्त्रियों के हक़-अधिकार की लड़ाई है। समता के मूल्यों के आधार पर समाज को रचने-गढ़ने की लड़ाई है। यह लड़ाई आज भी जारी है। ऊना से लेकर उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, मध्य प्रदेश और दिल्ली-हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान हर जगह जारी है। यह लड़ाई बीजेपी शासित राज्यों में भी जारी है और गैर बीजेपी शासित राज्यों में भी जारी है। यह लड़ाई साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ से होते हुए कॉर्पोरेट फासीवाद तक के विरुद्ध हर मोर्चे पर जारी है। 

 

खनिज लूट के खिलाफ आदिवासियों की हर लड़ाई, भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों की देश के विभिन्न हिस्सों में चल रही लड़ाइयों में भी पूंजीवाद से संश्रयबद्ध ब्राह्मणवाद के खिलाफ लड़ाई के तत्व निहित है। भूमि अधिकार के लिये, भूमि सुधार के लिये गुजरात से लेकर भागलपुर के दलितों-वंचितों द्वारा भूमि के सवाल पर नये सिरे से लड़ी जा रही लड़ाई भी ब्रह्मणवाद के खिलाफ ही तो है। विश्वविद्यालय कैंपसों में जातिगत आधार पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ, आरक्षण में किये जा रहे घपले-घोटालों के खिलाफ दलित-बहुजन छात्रों द्वारा लड़ी जा रही लड़ाइयां भी उम्मीद पैदा कर रही हैं। 

 

आइये बाबा साहब द्वारा आज से 90 वर्ष पूर्व शुरू की गई इस लड़ाई के अधूरे कार्यभार को पूरा करते हुए समतामूलक समाज बनाने का आज फिर से संकल्प व्यक्त करें!

 

(लेखक सोशल एक्टिविस्ट हैं और न्याय मंच बिहार से जुड़े हैं।)

 


खबरों की अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, ट्विटर और Youtube पर फॉलो करें---




Latest News

मोहसिन शेख हत्याकांड में मुंबई हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में अपील करेंगे परिजन

पटना में छात्रों ने किया जातिगत-वर्णगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष का ऐलान

रोहित वेमुला को इंसाफ के लिए मार्च निकाल रहे छात्रों पर पुलिस का कहर

नोटबंदी से कालाधन नहीं रुकेगा, जिससे रुकेगा वह सरकार ने किया ही नहीं- रिपोर्ट

भारत में 19 जनवरी को होगा लॉन्च Xiaomi Redmi Note 4

चरखे से हटाने के बाद अब गांधीजी की मूर्तियों की बारी!

मोटापे की गिरफ्त में 76 फीसदी आबादीः शोध

गुजरात लौटते ही मोदी पर हमलावर हुए हार्दिक पटेल

भारतीय मीडिया में फैला है भ्रष्टचारः मीनाक्षी लेखी

नर्सरी दाखिले में निजी स्कूलों के मनमाने मानदंड को लेकर शिक्षा मंत्री ने दिया नोटिस

गोंडा में अपरकास्ट गुंडों का दलितों पर कहर

जल्द आ रही है नई फिल्म 'अलिफ़', प्रेस क्लब में डायरेक्टर से मिलिए