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मोदी ने आकाओं के आगे एक ही दिन में हाथ जोड़े!

Created By : मुकेश त्यागी Date : 2016-12-26 Time : 13:09:33 PM

मोदी ने आकाओं के आगे एक ही दिन में हाथ जोड़े!

कल मोदी जी के मुँह से मुम्बई में कुछ दुस्साहसी बात निकल गई थी कि शेयर बाजार के लोग कम टैक्स देते हैं। कल से ही चर्चा शुरू हुई कि क्या सरकार कैपिटल गेन्स टैक्स बढ़ाएगी; क्या शेयर बाजार सोमवार को औंधे मुँह गिरेगा! 24 घंटे में ही अमीर आकाओं की नाराजगी के डर से मोदी-जेटली के हाथ-पाँव फूल गए; आज दोपहर होते-होते जेटली सफाई देने हाजिर हो गए|  

 

'मालिकों, हमारी हिम्मत कि हम ऐसा सोचें भी! लोग तो मोदी जी की बात को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं। हम कान पकड़ते हैं, हमारा कैपिटल गेन्स पर टैक्स बढ़ाने का कतई कोई इरादा नहीं।'

 

असल में इनकम टैक्स की अधिकतम दर दिखाने के लिए तो 30% है लेकिन इसके ना देने के उपाय भी इस कानून में कर दिए गए हैं। असल में अमीर लोगों की मुख्य आय वेतन से नहीं होती बल्कि उनकी संपत्ति पर पूँजीगत लाभ (capital gains) या लाभांश (dividend) से आती है। 

 

लाभांश पर मात्र 10 या 15% ही टैक्स लगता है। कैपिटल गेन्स का मतलब है शेयर, बांड्स या संपत्ति बेचने से प्राप्त लाभ। अभी हम सिर्फ शेयर की बात करते हैं। अभी शेयर मार्किट के जरिये 1 साल के पहले बेचने से प्राप्त लाभ पर मात्र 15% टैक्स लगता है और 1 साल के बाद कोई टैक्स नहीं। शेयर मार्किट से बाहर शेयरों पर दीर्घावधि लाभ हो तो टैक्स 10% है। दीर्घावधि म्युचुअल फंड पर भी सिर्फ 10% ही टैक्स है। समझा जा सकता है कि अमीर लोगों की मुख्य आय पर कर शून्य या बहुत कम है। 

 

अमीर लोगों को करों में इतनी छूट देने के लिए ही सरकार एक के बाद एक नए अप्रत्यक्ष कर, सेस, सरचार्ज, आदि लगाती जा रही है जिसमें GST सबसे नया है, जबकि प्रत्यक्ष करों जैसे कॉर्पोरेट टैक्स, इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स, विरासत (inheritance) टैक्स, आदि में लगातार छूट दे रही है। वजह - प्रत्यक्ष कर आमदनी/संपत्ति पर लगते हैं अर्थात ज्यादा आमदनी तो ज्यादा टैक्स जबकि अप्रत्यक्ष कर अमीर गरीब सब पर बराबर दर से लगाए जाते हैं। 

 

कॉर्पोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 25% किया जा रहा है और नोटबंदी के मुआवजे के तौर पर सबसे अमीर 3% लोगों को भी इस बजट में आयकर में छूट दिए जाने की चर्चा है। लेकिन GST जैसे नए अप्रत्यक्ष कर लगाने की तैयारी जोरों से जारी है। 

 

पर शिकायत कैसी? सरकार जिस तबके की है उसके लिए ही तो काम करेगी! कड़े फैसले मालिकों के खिलाफ नहीं लिए जाते जनाब क्योंकि वो लात मारकर बाहर का रास्ता भी दिखा सकते हैं! आपको अपने लिए काम चाहिए तो अपनी हुकूमत बनाइये।


 

लेखक - मुकेश त्यागी, बैंकिंग और वित्त पर स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं।


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