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सचिन माली मुक्ति के गीत गाते हैं, यह कोई मामूली अपराध है क्या?

Created By : ओम प्रकाश Date : 2017-01-09 Time : 15:03:51 PM


सचिन माली मुक्ति के गीत गाते हैं, यह कोई मामूली अपराध है क्या?

जब देश में स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी जा रही थी उन दिनों देश-भक्ति से प्रेरित गीतों ने जन-जन को जगाया। उन गीतों से प्रेरित लाखों लोगो ने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और लाखों कुर्बानी देकर देश को आज़ाद कराया। देश-भक्ति से ओत-प्रोत गीत लिखने वालों और उनके गाने वालों खूब वाहवाही मिली। वह तो स्वतंत्रता थी मिल गई देश आज़ाद हो गया लेकिन परदे के पीछे। आज भी भारत में लाखों लोग है जो अपनी स्वतंत्रता के लिए तरस रहे हैं। अगर वो अपनी बात के ज़रिए शोषितों की पीड़ितों की वंचितों सामाजिक न्याय की बात उठाते हैं तो सरकार उनको सलाखों के पीछे कर देती है। यह कौन सी स्वतंत्रता हुई?

 

 कबीर कला मंच से जुड़े सचिन माली और उतनी पत्नी शीतल साठे का नाम महाराष्ट्र सहित देश के कोने-कोने में नाम फैल चुका है। उनके गाये गीत लोगों को खूब भाते, क्योंकि उन गीतों में उन वंचित तबकों की आवाज़ है जिन्हें सरकार ने कभी तरजीह नहीं दी? सचिन माली संगीत और थिएटर के सहारे मानवाधिकार की बात करते और दलित पिछड़े जातीय हिंसा और भेदभाव के बारे में बताते और जागरुकता फैलाते। ये बातें दलित, पिछड़ों और आरक्षण का विरोध करने वालों को कहां पचती। उन लोगों ने सचिन पर आपराधिक षड़यंत्र और प्रतिबंधित किए गए संगठनों में शामिल होने के आरोप लगाए गए। 2 अप्रैल 2013 को मुक्ति के गीतों को हवा देने वाले सचिन माली को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

भारतीय संविधान में सबको अपनी बात कहने का हक और विचारों को स्वतंत्रता देने की बात कही गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मूल अधिकारों में शामिल किया गया है। आज देश की विडंबना है अगर आप मानवाधिकारों की बात करेंगे तो सरकार जीने नहीं देगी। सचिन माली की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र और देश के कई भागों में लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। सरकार के ख़िलाफ प्रदर्शन किए गए उनकी रिहाई की मांग उठी। आखिर 3 जनवरी 2017 को करीब 4 साल बाद जेल की दीवारे से सचिन माली बाहर आए।  
सचिन माली कि रिहाई पर क्या कहते हैं लोग....


वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं- "भारत में वर्तमान दौर के शायद सबसे खतरनाक कवि सचिन माली चार साल जेल में बिताने के बाद कल मुंबई की आर्थर रोड जेल से बाहर आए।

उनका स्वागत पत्नी शीतल साठे ने किया जो खुद बेहद लोकप्रिय कवि और कलाकार हैं। शीतल की गोद में उनका बच्चा और हाथ में संविधान था।
सचिन माली पर आरोप?
मुक्ति के गीत गाते हैं। यह कोई मामूली अपराध है क्या?"

 

विनीत तिवारी लिखते हैं- शीतल के पति सचिन माली की आज करीब 4 साल के बाद सावित्री बाई फुले के जन्मदिन पर ज़मानत हो जाना बहुत बड़ी उपलब्धि है। जानते हैं कि ज़मानत मिलना लड़ाई ख़त्म हो जाना नहीं है। अभी लड़ाई लंबी है लेकिन सचिन और शीतल का छोटा बच्चा है- चारेक साल का होगा। अभंग नाम है उसका। बहुत प्यारा है। उसे पिता का साथ मिलेगा और सचिन को भी अभंग के नन्हे मगर समझदार बचपन का संग रहेगा। शीतल ने भी बहुत भागदौड़ की है। उसे भी सचिन के पास रहने से लड़ने का नया हौसला मिलेगा, थोड़ी उसकी थकन कम होगी। शीतल और सचिन आर्थिक रूप से संपन्न पृष्ठभूमि से नहीं हैं। बहुत मुश्किल से सब साथियों ने मिलकर लड़ाई लड़ी। सबसे ज़्यादा तो कॉमरेड पानसरे, आनंद पटवर्धन और कॉमरेड प्रकाश रेड्डी, कॉमरेड भालचंद्र कानगो सक्रिय रहे। इनका तो मुझे पता है लेकिन निश्चित ही और भी बहुत लोग इस लड़ाई में शामिल थे। और मुम्बई और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मेहनत को भी शुक्रिया और सलाम।


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