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तमिलनाडु- सवर्णों के गांव में दलितों ने खुलवाए मंदिर के दरवाजे

Created By : नेशनल दस्तक ब्यूरो Date : 2017-01-11 Time : 11:52:27 AM


तमिलनाडु- सवर्णों के गांव में दलितों ने खुलवाए मंदिर के दरवाजे

नई दिल्ली। समय के साथ-साथ कहीं ना कहीं लोगों की सोच भी बदलती जा रही है। जहां एक तरफ दलितों को मंदिर और अन्य ऐसे धार्मिक जगहों पर जाने की उनुमति नहीं थी वहीं हरिहरपक्कम गांव नम्मांडी के मंदिर में दलितों को जाने की उनुमति मिल गई है। 

 

 

जी हां, सदियों से जिस मंदिर के दरवाजे सवर्णों के अलावा किसी और के लिए नहीं खुलते थे, उसमें अब बिना किसी भेदभाव के सबके लिए अपने दरवाजे खोल देने का फैसला किया है। आपको बता दें कि हरिहरपक्कम गांव और उसके पड़ोस में बसे नम्मांडी गांव में एक दलित बस्ती है लेकिन इस गांव में ज्यादा आबादी सवर्णों की है। 

 

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गांव नम्मांडी में एक दलित बस्ती के लोगों के साथ सवर्णों का विवाद था। दलितों की मांग थी कि उन्हें भी गांव के मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाए। लेकिन अब सबकी आपसी सहमति से इस मंदिर को हर किसी के लिए खोल दिया गया है। अब यहां किसी भी जाति तो क्या, किसी भी धर्म और संप्रदाय के लोग भी दर्शन के लिए आ सकते हैं।

 

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आपको बता दें कि अरुलमिगु थुलुकांतामन मंदिर सदियों पुराना है। दो महीने पहले यहां ताला लग गया था। गांव में वन्नियर समुदाय और दलितों के बीच मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद काफी आगे बढ़ गया था। गांव के बड़े-बुजुर्गों ने बुधवार को ग्राम सभा की एक विशेष बैठक बुलाने का फैसला किया। इस बैठक में तय किया गया कि मंदिर के दरवाजे अब सभी के लिए खुले रहेंगे। इसी गांव में रहने वाले एक बुजुर्ग बाबू ने बताया, 'हम कहने जा रहे हैं कि किसी भी जाति या संप्रदाय के लोग पूजा और प्रार्थना के लिए मंदिर में आ सकते हैं। हम बुधवार से यह प्रस्ताव लागू कर देंगे।'

 

 

इस मामले में बाबू के साथ गांव के कुछ अन्य वरिष्ठ ग्रामीण चेय्यार के सबकलेक्टर टी प्रभु शंकर से मंगलवार को मिले और उन्होंने मंदिर को फिर से खोलने की अपील की। ग्रामीणों की ओर से उन्हें एक लिखित समझौते की प्रति भी दी गई। इस मंदिर में दलितों का प्रवेश वर्जित था। इस परंपरा का टूटना एक ऐतिहासिक घटनाक्रम होगा। तमिलनाडु में कई ऐसे मंदिर हैं जहां दलितों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इस मंदिर में दलितों को प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद बाकी मंदिरों के भी इस नई परंपरा को अपनाने की संभावना रही है। बाबू बताते हैं कि जब से यह मंदिर बना है, तभी से ही इसमें दलितों के प्रवेश पर मनाही है।

 

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इस मंदिर में हिंदू देवी दुर्गा के एक रूप 'थुलुकांतामन' की प्राण प्रतिष्ठा है। इसे 25 दिसंबर 2016 को सील कर दिया गया था। मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर गांव के वन्नियर और दलित समुदाय के बीच सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाने के बाद मंदिर को बंद करने का फैसला लिया गया। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'अब ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर इस विवाद को सुलझाने की पहल की है।' 

 


सरकारी अधिकारियों ने जब शुरुआत में दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन तब वन्नियर समुदाय ने इसका विरोध किया था। रविवार को वन्नियर समुदाय के कुछ युवकों ने मंदिर का ताला तोड़ दिया था, जिसके कारण उनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद ही ग्रामीणों ने मंदिर को सभी समुदायों के लिए खोलने पर रजामंदी देने की पहल की।

 

 


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