National Dastak

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बहुजनों का मीडिया 'नेशनल दस्तक'

Created By : गुरिंदर आज़ाद Date : 2016-12-20 Time : 18:03:09 PM

बहुजनों का मीडिया 'नेशनल दस्तक'

बाबा साहेब अंबेडकर ने 1943 में कहा था, 'अगर प्रेस हाथ में है तो महान व्यक्ति आसानी से उत्पादित किये जा सकते हैं.' उन दिनों मीडिया में पहुँच केवल ब्राह्मण की थी और 1947 में अंग्रेजों से ताक़त ब्राह्मणों के पास आ जाने पर प्रेस यानि मीडिया भी पूरे तरीके से ब्राह्मणों के कब्ज़े में आ गया। इस मीडिया ने एक तरफ जमकर इतिहास से छेड़खानी की तो दूसरी और वंचित तबकों को मीडिया से बाहर रखा. ये बात छोटी नहीं है। 


आज की भयावह परिस्थितियां इस बात का प्रमाण हैं कि वंचित तबकों में से अच्छी-खासी संख्या ने मासूमियत से ब्राह्मणवाद के प्रचार यानी ब्राह्मण के नैरेटिव को क़ुबूल किया। ये भयानकता और भी सर चढ़ के बोलती अगर अंबेडकरवादी विचारधारा के सचेत लोगों ने अपने दमपर अपने इतिहास को लिखने की नहीं ठानी होती और ब्राह्मणवाद की कलई न खोली होती। आज भारत के कोने कोने से वंचित तबकों की आवाज़ के रूप में बहुत सी पत्रिकाएं निकल रही हैं जो भले ही कथित 'मेनस्ट्रीम' पत्रिकाओं की मानिंद आकर्षक नज़र ना आएं एवम उनके जैसी व्यापक पहुँच न रख पाएं लेकिन दरअसल असली इतिहास और खरे खरे सच अपने भीतर समोए हुए हैं।


वंचित तबकों के ये निरंतर प्रयास आज एक कारवां के रूप में अपनी अच्छी खासी पहचान बना चुके हैं। धन्यवाद् हो इन्टरनेट का जिसने सोशल मीडिया के रूप में दलित, आदिवासी, पछड़े और पसमांदा मुस्लिम समाज से बेशुमार लोगों को खालिस पत्रकार, लेखक बनने का मौका और हौसला प्रदान किया है। 


आज ऑनलाइन पोर्टल के रूप में कई ब्लॉग, न्यूज़ पोर्टल इत्यादि ख़बरों और अपने ज़मीनी नज़रिये को ज़ुबान दे रहे हैं। ऐसे ही एक कामयाब प्रयास में 'नेशनल दस्तक' पोर्टल है जिसका आज यानि 20 दिसम्बर को एक साल पूरा हुआ है। इस पोर्टल ने एक बरस के भीतर ही बहुत तेजी से अपनी पहचान बनाई है। 


वेबसाइट पर मौजूद कंटेंट में व्यापकता है। विडियो सेक्शन है। मुद्दों की ठीकठाक कवरेज है। दृष्टिकोण है। यह सब माहौल नेशनल दस्तक के सबल भविष्य की और ईशारा करता है।

 

सही ख़बर के साथ साथ बहुजन नज़रिया अंबेडकर युग का एक ख़ास और ज़रूरी पहलु है। मुझे पूरी उम्मीद है नेशनल दस्तक का ये सफर भले ही नई मंज़िलों की ओर दस-बीस कदम देर से बढ़े लेकिन कभी भी झुकेगा नहीं।


मेरी तरफ से नेशनल दस्तक को उसके पहले जन्मदिन पर बहुत बधाई। जय भीम।

 

लेखक- गुरिंदर आज़ाद, राउंड टेबल इण्डिया से जुड़े हैं. वे कवि, लेखक और दलित सामाजिक चिन्तक हैं. 
 


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