Switch to English

National Dastak

x

बैंगलोर में जो हुआ वही असल में हमारी संस्कृति है, दशकों से

Created By : अमित तिवारी Date : 2017-01-05 Time : 21:33:41 PM


बैंगलोर में जो हुआ वही असल में हमारी संस्कृति है, दशकों से

मानिए या न मानिए.. इतिहास का हवाला दीजिये या धार्मिक किताबों का.. कोई आयत या श्लोक पढ़ दीजिये.. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः... हो सकता है ऐसा रहा हो कभी.. लेकिन जितना इतिहास मैंने पढ़ा है उसमे ऐसा नहीं दिखा कभी.. ऐसी बातों को छाती फुलाने वाली हवा की तरह इस्तेमाल किया जाता है..


बैंगलोर में जो हुआ वही असल में हमारी संस्कृति है, दशकों से.. फर्क ये पड़ा है कि अब पता चलने लगा है.. दिखने लगा है.. और जहाँ तक मैं देखता हूँ, समझ पाता हूँ वहां तक ये इस देश की ही नहीं पूरे विश्व की ही मानसिकता है..


प्रेमचन्द ने कहा था "महिलाएं पुरुषों से ज्यादा विकसित होती हैं"... अधिकांश पुरुष शक्ति को बुद्धि पर वरीयता देते हैं.. उसी का इस्तेमाल भी करते हैं.. छेड़छाड़ जैसी घटनाओं में हमारा देश अग्रणी है इसके लिए कोई एक वजह नहीं है.. परिवार, समाज, प्रशासन और न्याय प्रणाली सब बराबर जिम्मेदार हैं..


लड़कियों के अस्तित्व को हमेशा और हर जगह शारीरक उद्देश्य दिया जाता है.. जिसको परिवार से बुजुर्गों की घटिया मानसिकता से लेकर नाली में लोटती कानून व्यवस्था तक, सबसे पोषण मिलता है..


मैं नहीं जानता कि ये कैसे बदलेगा या सुधरेगा.. और कितने समय में.. मेरे लिखने का इस सब पर क्या असर पड़ेगा, मुझे नहीं पता.. मैं ये भी नहीं जानता कि दोस्तों, भाई-बहनों और ऑफिस में इस पर चर्चाएँ करने से कितना कुछ सही हो जाएगा.. हम सब एक सुन्न हो चुकी सभ्यता का हिस्सा हैं.. हमें समाज के दुसरे हिस्सों का दर्द पता नहीं चलता और हमारे लिए कोई नहीं बोलता, इसपे रोते रहने की दोगली आदत है..


भूल जाना हमारे लिए आदत और इलाज दोनों है.. पैर की चोट पकड़ के थोड़े दिन रो लेते हैं.. रस्ते के पत्थर हटाने की मेहनत से बच लेते हैं.. “ये मेरा काम नहीं” हमारे देश की टैगलाइन होनी चाहिए.. पुरुषों की नीचता कब खत्म होगी.. लड़कियों को चीज़ कब समझना बंद किया जाएगा.. उनके अस्तित्व को शारीरक उपभोग से इतर भी जाने कब समझा जाएगा.. मुझे नहीं पता है..


बस इतना पता है कि निकट भविष्य में होता नहीं दिखता.. मुझे आप चाहे जो कह लीजिये.. मैं समाज और कानून व्यवस्था में ऐसा सुधार इतनी जल्दी होते नहीं देखता.. निराशावादी कह लीजिये या डरपोक या कमजोर.. लेकिन जब से सोचने समझने लायक हुआ हूँ.. ये सब होने की खबरें सुनते आया हूँ.. और काफी साल हो गये.. हालत बदतर ही हुई है.. या लगने लगी है.. लेकिन सुधार की एक बूँद भी टपकती नहीं दिखी कहीं से भी..


पहले भी कुछ ही आवाज़ उठाते थे.. अब भी कुछ ही.. कुछ से इतना बड़ा सामाजिक बदलाव नहीं आएगा.. माथे पर इस बात को चस्पा कर लीजिये.. लेकिन उम्मीद में हूँ.. कि विरोध करना सीखेंगे.. हर गलत बात का.. चाहे आप पर बीते या नहीं.. जवाब मांगिये परिवार से.. समाज के ठेकेदारों से.. सत्ता से.. अदालतों से.. माँ-बाप और बड़े जो कहें, धर्म जो कहे उसको एकदम से मत मानिए.. सवाल पूछिये.. 


शारीरिक भेदभाव पर सवाल उठाइये.. घरवालों से, पुजारियों से, महंतों से, मौलवियों से, टीचर से.. डर लगता होगा, पर ये जो आज हो रहा है, घर से शुरू हुई उसी डर की सीरीज का नतीजा है.. एक ही सुझाव है.. थोड़ा सतर्क रहिये.. जहाँ भी जाइए, जो भी करिए.. सतर्क रहिये.. कौन लोग और कौन सी जगह भरोसे के लायक है, ये बारीकी से तय कीजिये..


आत्मरक्षा के बारे में सीखिए.. मेकअप के साथ किकबॉक्सिंग और ताईक्वान्डो में भी समय इन्वेस्ट कीजिये.. पुरुषवादी जानवर कब और कैसे सुधरेंगे मुझे नहीं पता.. मैं अकेले सबको नहीं बदल सकता.. कोई भी अकेले या दो-चार लोगों के साथ नहीं सुधार ला सकता..  और जिनको सुधारने की ठेकेदारी दी गयी है उनके नितम्बों को नरम गद्दों की आदत लग गयी है.. और हाँ, इसके लिए भी हमारे DNA में भरी चाटुकारिता ही जिम्मेदार है..


बस इस अपेक्षित सुधार के आ जाने तक जो भी समय लगे, उस दौरान मैं आप सबको सतर्क और सुरक्षित देखना चाहता हूँ..!


लेखक- अमित तिवारी, पेशे से इंजिनियर हैं मुंबई में रहते हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं.


खबरों की अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, ट्विटर और Youtube पर फॉलो करें---




Latest News

सीट कटौती के खिलाफ जेएनयू के छात्र और शिक्षकों का प्रदर्शन, लाठीचार्ज

शिवसेना ने कहा RSS प्रमुख मोहन भागवत को बनाया जाए राष्ट्रपति

यूपी में बूचड़खानों बंद कराने पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मेरठः बजरंग दल ने भाजपा नेता राहुल ठाकुर की मीट फैक्ट्री पर बोला धावा, जमकर की धुनाई

जेपीएससी रिजल्ट में आरक्षण की अनदेखी पर छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने चलाई गोली

बिहारः 80 साल की महादलित महिला को डायन बताकर जिंदा जला दिया

ग्राउण्ड रिपोर्टः बूचड़खाने की आड़ में चिकन मटन की दुकानें भी बंद करा रही पुलिस

मासिक धर्म में अपवित्र हो जाती हैं महिलाएं, किसी भी पूजाघर में ना जाएं: कांग्रेस नेता

...तो क्या विश्वविद्यालयों में सीटें घटाकर और उन्हें बंद करके अच्छे दिन लाएगी मोदी सरकार!  

प्रतापगढ़ः दबंगों ने दलित परिवारों के गिराए मकान

बीएसपी की मीटिंग में हंगामा, कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं पर लगाए टिकट बेचने के आऱोप

यूपी पुलिस ने मुर्गे का मांस बेच रहे युवकों का किया चालान

Top News

सीट कटौती के खिलाफ जेएनयू के छात्र और शिक्षकों का प्रदर्शन, लाठीचार्ज

यूपी में बूचड़खानों बंद कराने पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

जेपीएससी रिजल्ट में आरक्षण की अनदेखी पर छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने चलाई गोली

बिहारः 80 साल की महादलित महिला को डायन बताकर जिंदा जला दिया

मासिक धर्म में अपवित्र हो जाती हैं महिलाएं, किसी भी पूजाघर में ना जाएं: कांग्रेस नेता

...तो क्या विश्वविद्यालयों में सीटें घटाकर और उन्हें बंद करके अच्छे दिन लाएगी मोदी सरकार!  

बीएसपी की मीटिंग में हंगामा, कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं पर लगाए टिकट बेचने के आऱोप

यूपी पुलिस ने मुर्गे का मांस बेच रहे युवकों का किया चालान