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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होने की कही बात

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(image credits: Transparency International)

अर्थवयवस्था में रफ़्तार से बढ़ोतरी के बात करने वाले मौजूदा सरकार की पोल खुलती नजर आ रही है। मौजूदा सरकार अक्सर अपने कार्यकाल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की बाते करती है, साथ ही वह इससे सम्बंधित आकड़े भी पेश करती है। लेकिन असलियत में देश की अर्थव्यस्था की क्या तस्वीर है यह विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को भलि भाति मालूम है।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) जो लगभग सभी देशो की अर्थव्यवस्था की गति पर नजर बनाए रहता है, उसने हाल ही में भारत में आर्थिक विकास को लेकर 2019 और 2020 के लिए देश की (जीडीपी) ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानि सकल घरेलू उत्पाद के ग्रोथ रेट के अनुमान को घटाया है।

आईएमएफ ने दोनों सालों के लिए वृद्धि दर के अनुमान में 0.3-0.3 प्रतिशत की कटौती की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह घरेलू मांग के उम्मीद से कमजोर हालात को दर्शाता है। आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार, 2019 में भारत की वृद्धि दर 7 प्रतिशत और 2020 में 7.2 प्रतिशत रहेगी।

आईएमएफ ने कहा कि उसने दोनों सालों के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान में 0.3-0.3 प्रतिशत की कटौती की है। इन आकड़ो से हम यह कह सकते हैं की आने वाले समय में भी देश की अर्थव्यस्था की रफ्तार में कमी देखी जाएगी। जिसकी जायदातर जिम्मदारी मौजूदा सरकार की ही होगी। आईएमएफ ने अपने ग्लोबल इकॉनमिक सिनेरियो (विश्व आर्थिक परिदृश्य) ‘अपडेट’ में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2019 में 7 प्रतिशत रहेगी और 2020 में कुछ बढ़कर 7.2 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

साथ ही आईएमएफ ने चीन की अर्थव्यवस्था के बारे में भी कहा कि, चीन में शुल्क वृद्धि के नकारात्मक प्रभाव और कमजोर बाहरी मांग से पहले से सुस्ती झेल रही अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा। कर्ज पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए चीन को मजबूत नियम कायदों की जरूरत पड़ेगी।


रिपोर्ट जारी करते हुए आईएमएफ की भारतीय मूल की अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि 2019 के लिए वैश्विक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.2 प्रतिशत किया गया है। वहीँ इसके साथ 2020 के लिए इसे घटाकर 3.5 प्रतिशत किया जा रहा है। गोपीनाथ ने आगे कहा कि यह अप्रैल के अनुमान से दोनों सालों के लिए 0.1 प्रतिशत की कटौती है।

आपको बता दें की मौजूदा सरकार आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन बनाने का दावा कर रही है। लेकिन जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट से अर्थव्यवस्था की गति में गिरावट आएगी तो, सरकार अपने किये गए दावे में किसी भी सूरत में कामयाब नहीं हो पाएगी।

अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी पड़ने के पीछे के कारण मौजूदा सरकार की नीतिया होगी। बीजेपी सरकार के पिछले कार्यकाल में उनके गलत निर्णयों के कारण
देश की जनता को काफी प्रभाव पड़ा था। यहां एक बात और ध्यान देने वाली है की, जब सरकार द्वारा कुछ गलत कदम उठा लिए जाते हैं तो ज्यादातर इसका प्रभाव गरीब और लोअर मिडिल क्लास वर्ग के लोगो को होता हैं।

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