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बहुजन क्रांति मोर्चे में उठे कई अहम मुद्दे, लोकसभा चुनाव में बढ़ेगी पार्टियों की मुश्किलें

आगरा में हुई बहुजन समाज की महारैली में लोकसभा चुनाव 2019 में ईवीएम हटाओ बैलेट पेपर लाओ मुद्दे पर जोर दिया गया।  बहुजन क्रांति मोर्चे के राष्ट्रीय संयोजक वामन मेश्राम ने मौजूदा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा की वर्तमान की सरकार ईवीएम मशीन के द्वारा चुनी हुई एक घोटालो की सरकार है। ईवीएम मशीन देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है । विपक्ष में बैठी राजनैतिक पार्टिया लगतार इस मुद्दे को उठाते रही है। मेश्राम ने यह भी कहा की एक साफ, निष्पक्ष, भय मुक्त, पारदर्शी चुनाव सिर्फ बैलेट पेपर के द्वारा ही संभव है।

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बहुजन क्रांति संगठन के मण्डल प्रभारी जनार्दन अनुरागी ने अपनी बात रखते हुए कहा की बहुजन क्रांति मोर्चा के माध्यम से समाज के सभी शोषितो जिसमे एससी, एसटी, ओबीसी  और अल्पसंख्यक सभी को एक करके एक शक्ति का निर्माण किया जा रहा है, इसके साथ ही वक्ताओं ने चुनावी मुद्दों पर ज्यादा जोर देते हुए चुनाव को बैलेट पेपर से कराने और ईवीएम मशीन को हटाने के लिए  ‘ईवीएम हटाओ बैलेट लाओ’ का नारा भी दिया।

बहुजन समाज क्रांति के मुख्य वक्ताओं ने कहा की पिछले दिने सभी संपन्न चुनावो में बड़े  पैमाने पर धांधली करी गई है विपक्ष में बैठी राजनैतिक पार्टिया ने नेताओ ने इसपर कई सवाल भी उठाये पर चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर कभी ध्यान ही नहीं दिया। सभी तमाम स्थानों पर जीते हुए प्रत्याशियों को हराकर सविधान का खुला मजाक बना दिया गया है, ऐसा इतिहास में आज तक नहीं हुआ।

कार्येकर्ताओ के यह साफ़ कह दिया है की उसकी लड़ाई तब तक ज़ारी रहेगी जब तक चुनाव ईवीएम मशीन को हटाकर बैलेट पेपर से नहीं कराये जाते। मंडल स्तरीय महा रैली का आयोजन बदलते परिदृश्ये में विभिन्न पार्टियों के लोग दलित पिछड़े अल्पसंख्यक का धुर्वीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। बहुजन क्रांति मोर्चे के जिलाध्यक्ष अमन बाबा ने कहा की बहुजन समाज में 85 प्रतिशत लोगो का हिस्सा 15 प्रतिशत लोग खा रहे है। बाबा ने इसके साथ है बहुजन समाज से जुड़े कई मुद्दों को सभा में उठाया।


एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट को और मजबूत करना चाहिए

एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट कानून को और मजबूत रूप देना चाहिए। सफाई कर्मचारी की संविद वयवस्था को ख़ारिज करके उनको पहले जैसी सरकारी नौकरी में रखा जाना चाहिए।  वही आदिवासी लोगो के उत्थान के लिए भी कदम उठाने की आवश्यकता है, कई आदिवासी इलाको में लड़के, लड़कियों की तस्करी का मामला भी सामने आया था। भुखमरी, कुपोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि का आभाव अभी तक है जो आदिवासियों के नरसंहार का मामला है।

ओबीसी की जाती आधारित जनगणना कराई जानी चाहिए जिससे उनकी सही मायने में संख्या के आधार पर 52 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। बहुजन समाज में महिलाओ के उत्थान के लिए कड़े काननू बनने चाहिए उनके ऊपर हो रहे अत्याचार और अन्याओ के खिलाफ कानून बनाना चाहिए। बहुजन क्रांति मोर्चा पुरे भारत में एक साथ जनांदोलन की तैयारी कर रहा है।

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