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बीजेपी सरकार के पिछले वर्ष के कार्यकाल में बैंको में जालसाजी की रकम में हुई 73.8 फीसद बढ़ोतरी

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(image credits: international banker)

दूसरी बार सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने भ्रस्टाचार और बैंको में धोखादड़ी सम्बन्धी मामलो को कम करने के दावे किये। इसके लिए मौजूदा सरकार ने बहुत से कदम उठाने की भी बात कही। परन्तु सरकार की इन तमाम कोशिशों के बाद भी कुछ असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है।

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दरअसल मौजूदा सरकार के पिछले एक साल के कार्यकाल के दौरान बैंकों में जालसाजी के मामले 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई हैं। रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में इसकी पुष्टि की गई है।

रिपोर्ट में इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि रकम के हिसाब से जालसाजी में 73.8 फीसदी की भारी बढ़त हुई है। हालांकि, रिजर्व बैंक का कहना है कि ये सभी केस पिछले वित्त वर्ष में पकड़े जरूर गए हैं, लेकिन ज्यादातर कई साल पुराने हैं।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया RBI के सालाना रिपोर्ट की बात करे तो, वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकिंग सेक्टर में 6,801 जालसाजी के मामले हुए। जिसमें 71,542.93 करोड़ रुपये की रकम शामिल थी। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा सार्वजनिक बैंकों का ही है। जिनमें 64,509.43 करोड़ रुपये के 3,766 फ्रॉड केस हुए। इसके पिछले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में 41,167.04 करोड़ रुपये रकम के 5,916 फ्रॉड केस हुए थे।

बता दे की देश में बैंक के कर्ज में सबसे बड़ा हिस्सा भी सार्वजनिक बैंकों का ही होता है। मौजुदा सरकार के इतने दावे के बाद भी, मोदी सरकार में जालसाजी के मामलों की पहचान में काफी देर लग रही है। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों को जालसाजी की पहचान करने में केस होने के बाद औसतन 22 महीनो का समय लग रहा हैं।


ऐसे ही वर्ष 2018-19 में 100 करोड़ या उससे ऊपर के कुल 52200 करोड़ रुपये की बड़ी जालसाजी वाले मामलों की जो पहचान हुई है। उसमें औसतन 55 महीने यानी करीब 6 साल लग गए। जालसाजी के ज्यादा मामले निजी बैंकों से संबधित है। वहीँ जानकार इस बात से हैरान हैं कि विदेशी बैंक इससे काफी बचे रहे हैं। 2018-19 में विदेशी बैंकों में जालसाजी के सिर्फ 762 केस पकड़े गए जिनमें करीब करीब 955 करोड़ रुपये की रकम ही शामिल थी।

देखने वाली बात यह है की जहां एक तरफ मौजूदा सरकार अर्थव्यवस्था की गति बरक़रार रखने में विफल हुई है, वहीँ इसके साथ ही वह बाकि मामलो में भी अपने वादे के अनुसार परिणाम देने में असफल शाबित हो रही है। खैर अब देखना यह होगा की मौजूदा सरकार आने वाले समय में वह कौन से ऐसे कदम उठाएगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था वर्तमान की तरह प्रभावित न हो सके।

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