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ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर में आई मंदी के बाद अब चाय उद्योग की हालत भी खस्ता, 50 लाख लोगो पर नौकरी खोने का संकट

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(image credits: the hindu)

देश में ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर में आई मंदी के बाद अब चाय उद्योग की हालत भी खस्ता दिख रही है। हाल ही में ऑटो सेक्टर में आई गिरावट के कारन लगभग 4 लाख लोगो के रोजगार प्रभावित होने की खबर सामने आई। ऑटो सेक्टर में आई मंदी के पीछे लोगो द्वारा मांगों में कमी को बताया गया, वही कुछ कम्पनियो ने मांग में कमी आने के पीछे GST (गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स) को भी ठहराया है।

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कुछ इसी तरह अब चाय उद्योग में भारी कमी देखी जा रही है। जिसके कारण 50 लाख से अधिक लोगों के रोजगार पर प्रभाव पड़ सकता हैं। अगर चाय उद्योग को सरकार का सहारा नहीं मिला तो फिर आने वाले समय में चाय की चुस्कियों के भी लाले पड़ जाएंगे। खुद बीजेपी नेता ने चाय उद्योग में गिरावट के बारे में जानकारी दी है। 

भाजपा सदस्य पल्लव लोचन दास ने लोकसभा में इस मुद्दे को पिछले महीने उठाते हुए कहा कि चाय उद्योग की हालत खराब है। चाय उत्पादकों को उत्पाद का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चाय उद्योग से संबंध में दो कानून हैं जिसमें से एक चाय अधिनियम और दूसरा चाय बगान श्रमिक अधिनियम है। आज स्थिति यह है कि चाय उद्योग से जुड़ी बड़ी-बड़ी कंपनियां बंद हो रही है, श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है। 

ऐसे में भाजपा सदस्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में चाय अधिनियम और चाय बगान श्रमिक अधिनियम में संशोधन करने की जरूरत है। वही इसको लेकर भारतीय चाय संघ (ITA) ने सरकार से मदद मांगी और दखल देकर चाय उद्योग के पुनरुद्धार की अपील की है। आईटीए ने बृहस्पतिवार को तमाम अखबारों में विज्ञापन देकर यह अपील की है।

ITA ने गुरुवार को सरकार से तीन साल के लिये चाय बागान श्रमिकों का भविष्य निधि में जाने वाले हिस्से का योगदान करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही भारतीय चाय संघ ने पांच साल के लिए अधिक आपूर्ति को रोकने के लिए चाय क्षेत्र के विस्तार पर भी रोक लगाने की मांग की है। इसके आलावा संघ ने सरकार से कुछ चीजों की मांग भी की है, उन्होंने सरकार से चाय की नीलामी में न्यूनतम आरक्षित मूल्य तय करने के लिए भी कहा जो उत्पादन लागत पर आधारित हो।

अपील में ITA ने कहा कि 10 लाख से अधिक कार्यबल के रोजगार की सुरक्षा के लिए चाय क्षेत्र की व्यवहार्यता बने रहनी अनिवार्य है। ITA ने अखबारों में दिए विज्ञापन में एक ग्राफ भी दिया है।   जिसमें पंजीकृत चाय बागानों में चाय की औसत उत्पादल लागत और उसके औसत बिक्री मूल्य का अंतर बताया गया है। यह तुलना 2013-14 और 2018-19 के आंकड़ों के बीच की गयी है।


आपको बता दे की इन आकड़ो के मुताबिक 2013-14 में चाय की औसत बिक्री मूल्य 150 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर थी जबकि उत्पादन लागत 150 रुपये प्रति किलोग्राम से थोड़ी नीचे रही। वहीं 2018-19 में इसकी उत्पादन लागत 200 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर पहुंच गयी जबकि बिक्री मूल्य उसी स्तर पर ही बना रहा। जिससे चाय उद्योग में घाटा देखा गया।

मौजूदा सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को लेकर सही निर्णय नहीं लेने के कारण आज ये सारी समस्याएँ आने लगी है। जिसके कारण लगभग करोड़ो लोगो के रोजगार पर बुरा असर पद सकता है। केंद्र की बीजेपी सरकार को इस संदर्भ में गंभीरता से विचार करने की जररूत है।  और अगर सरकार ऐसा करने में असफल रहती है तो हमे यह समझ लेना होगा की मौजूदा सरकार नागरिको को रोजगार देने के मामले में गंभीर नहीं है। 

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