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आगरा : हाईकोर्ट ने 21 दलितों पर लगाए गए मुकदमें को खारिज कर दिया, 2 अप्रैल को बंद के दौरान का है मामला

Bharat Band
(Image Credits: India.com)

आगरा में 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया गया था। इस बंद के दौरान आगरा में कई स्थानों पर आगजनी और बवाल हुआ था। भारत बाद के दौरान हुई तोड़फोड़, आगजनी और बवाल में पुलिस ने दलित समुदाय के कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इन लोगों पर विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किये गए थे।

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इन मुकदमो में सुरेश चंद्र सोनी आगरा के वकील ने निशुल्क पैरवी का ऐलान किया था। इन मामलों को हाईकोर्ट तक पहुंचाया गया था। सुरेशचंद्र सोनी ने पत्रिका को जानकारी देकर बताया था की उच्च न्यायालय द्वारा 21 दलितों पर लगाए मुकदमें को खारिज कर दिया गया है।

दलितों पर दर्ज हुआ था मामला

वकील सुरेश चंद्र सोनी ने बताया की सदर थाना की रिपोर्ट 29-07-18 के अनुसार न्यायालय ने बाद संख्या -70/18 दर्ज करके 21 दलितों को तलब कर लिया और दलितों के विरुद्ध नोटिस जारी कर दिया। इस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने धारा 482 के अन्तर्गत पुलिस की रिपोर्ट व अदालत के आदेश को चुनौती दी।

उच्च न्यायालय ने 14-11-18 को पुलिस व अदालत के आदेश को ख़ारिज कर दिया। जिस पर दलित जगन, सुभाष, पप्पू, महेश, राधेलाल, सुकराम, राजेश, सतीश, संतोष, लाखन सिंह, डालचंद, गोपाल, मुकेश, धर्मवीर, चंद्रभान, रघुवीर, हेमराज , राम प्रकाश, सुनील कुमार, राजेंद्र, सुरेंद्र के घरों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इन लोगों में से किसी भी दलित को जेल नहीं हुई। उन्होनें कहा की पुलिस द्वारा झूठा मुकदमा दर्ज करने पर सभी दलित न्यायालय के माध्यम से मुआवजे की मांग करेंगे।


पैरवी निशुल्क की गई

भारत बंद के दौरान सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष सुरेश चंद्र सोनी एडवोकेट द्वारा गिरफ्तार और आरोपी बनाए गए दलितों का केस बिना कोई शुल्क के लड़ने की पहले ही घोषणा कर दी गई थी। एडवोकेट ने इस मामले के सभी केसों में कोई फीस नहीं ली और 21 दलितों पर चल रहे मुकदमें को खारिज करवा दिया।

(News Source: Patrika)

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