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योगी सरकार में सचिव और अखिलेश के करीबी पर लगे एक्‍सप्रेस वे में भ्रष्‍टाचार के आरोप

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मामला पिछले साल का है 13 अप्रैल 2017 को मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर पर मुरादाबाद के अधिवक्ता दुष्यंत चौधरी ने भ्र्ष्टाचार का आरोप लगाए थे।

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डीएम जुहैर बिन सगीर अखिलेश सरकार अखिलेश के बहुत करीबी माने जाने वाले जुहैर बिन सगीर अब मुसीबत में फसते नज़र आ रहे है। आपको बता दे की जुहैर बिन सगीर पर उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद और आगरा में भी मामले दर्ज किए गए हैं। उनपर एक्‍सप्रेस वे में भ्रष्‍टाचार करने के गंभीर आरोप लगाए गए है।

जानिए क्या था मामला

मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर आरोप तब के है जब वह आगरा और मुरादाबाद में तैनात थे उसी दौरान अपनी बहन को सर्वेक्षित भूमि में से जमीन खरीदवाने और लाभ लेने का आरोप है। ये जमीन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के पास फतेहाबाद गांव में पड़ती है।

आईएएस जुहैर बिन सगीर के खिलाफ आगरा के फतेहाबाद थाने में दर्ज एफआईआर। फोटो- आशु प्रज्ञ मिश्र।

जुहैर बिन सगीर योगी सरकार में कृषि उत्पादन विभाग में विशेष सचिव (लघु सिंचाई) के तौर पर अभी कार्यत है, वही उनके खिलाफ (24 अक्टूबर) को मुरादाबाद के दो थानों में एफआईआर दर्ज करवाई गई। ये शिकायत बरेली के विजिलेंस विभाग ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज करवाई है। एफआईआर में जुहैर बिन सगीर सहित पूर्व तहसीलदार सदर संजय कुमार, अर्बन सीलिंग विभाग के सहायक अभियंता सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता, कनिष्ठ लिपिक हरवेंद्र कुमार व रीता सिंह, पेशकार इंद्रजीत सिंह, भूमि कब्जाने की आरोपी नसीमा बानो के नाम दर्ज हैं।


आईएएस जुहैर बिन सगीर के खिलाफ आगरा के फतेहाबाद थाने में दर्ज एफआईआर। फोटो- आशु प्रज्ञ मिश्र।

 

विजिलेंस ने भी कराई FIR

इस पुरे मामले में कई जगह पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है वही मूंढापांडे थाने में विजिलेंस विभाग ने एक और मामले पर एफआईआर दर्ज करवाई है जिसमे जुहैर बिन सगीर और अन्य कुछ लोगो पर जेल की जमीन का घोटाला करने के आरोप में दर्ज करवाया गया है।
विजिलेंसने अपने शिकायत में सभी आरोपियों ने अपने पद का दुरूपयोग कर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की 68 हजार वर्ग मीटर जमीन को फर्जी दस्तावेज तैयार कर निजी खाता धारकों को सौंप देने के गंभीर आरोप लगाए।

जिसमे तत्कालीन एडीएम सिटी अरुण श्रीवास्तव के अलावा संजय कुमार, राजस्व निरीक्षक परवेज खां, लेखपाल सुभाष चंद्र शर्मा के साथ ही सौरभ जैन, सौम्य जैन और जुल्फिकार अली को भी नामजद किया गया है। एडीएम अरुण कुमार श्रीवास्तव मुरादाबाद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बाकी आरोपी अभी मुरादाबाद में तैनात हैं।

घोटाला 28 मई 2016 से 23 मई 2017 के बीच हुआ। विजिलेंसने ने जिन सभी अधिकारियो पर मुकदमा दर्ज करवाया है उन सभी ने अपने पदों और अधिकारों का हनन कर सीलिंग के 15 मुकदमों पर अवैध रूप से फैसला लेकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। वहीं डीएम मुरादाबाद के पद पर तैनाती के दौरान सगीर ने नसीमा बानो को जमीन दिलवाकर 20.45 लाख रुपये का लाभ भी लिया था।

तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर पर मुरादाबाद के अधिवक्ता दुष्यंत चौधरी ने भ्र्ष्टाचार का आरोप लगाए थे जिसके बाद ही आरोपों की जांच के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच कमिटी गठित हुई तीन सदस्यीय जांच समिति ने 13097.17 वर्ग मीटर सीलिंग की जमीन छोडऩे के मामले में डीएम, एडीएम सिटी के साथ आठ को आरोपी बनाया था। शासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस को फिर से जांच करने का आदेश दिया था। जिसके बाद 12 जुलाई 2017 को जाँच के बाद विजिलेंस विभाग के अधिकारिओ ने जाँच शुरू कर दी जांच के दौरान कई बाते सामने आई और दो साल की लंबी जांच के बाद इन सभी आरोपितों के खिलाफ शासन के निर्देश पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।

 

न्यूज़ क्रेडिट: जनसत्ता
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