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370 हटाने पर अमर्त्य सेन ने बीजेपी सरकार की करी आलोचना, कहा- भारतीय के रूप में इस बात पर गर्व नहीं कर सकता

(image credits virginia tech daily)

अर्थव्यवस्था को लेकर मौजुदा सरकार पर निशाना साधने वाले अर्थशास्त्री अमर्त्यसेन ने एक बार फिर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा घाटी को लेकर लिए गए बड़े निर्णय के खिलाफ सवाल खड़े किये है।

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NDTV को दिए एक इंटरव्यू में नोबल पुरुस्कार विजेता सेन ने मौजूदा सरकार के फैसले को न सिर्फ बहुसंख्यकवाद की हुकूमत बताया, बल्कि यह भी कहा कि यह सभी लोगों के लिए समान अधिकारों के खिलाफ भी है।

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि लोकतंत्र के बिना जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में कोई समाधान निकलेगा. कई स्तरों पर सरकार के फैसले में खामियों की ओर इशारा करते हुए। अर्थशास्त्री अमर्त्यसेन ने इंटरव्यू के दौरान कहा, ‘एक भारतीय के रूप में इस बात पर गर्व नहीं कर सकता कि एक लोकतांत्रिक देश की हैसियत से तमाम उपलब्धियों के बावजूद हमने इस फैसले से अपनी प्रतिष्ठा खो दी है.’

आपको बता दें कि सरकार ने इस महीने की शुरुआत में जम्मू कश्मीर राज्य से विशेष दर्जा खत्म करते हुए उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा था, जिसे कई राजनीतिक दलों और राजनेताओं ने समर्थन भी किया था। वहीं इसके साथ ही जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल पर कई प्रमुख विपक्षी दलों और बड़े नेताओं द्वारा समर्थन किया गया। यहां तक की कांग्रेस के एक धड़े ने भी जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने की भूरी-भूरी प्रशंसा भी की है।

विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर भी बाकि राज्यों के तरह ही समान हो गया है। इसका अर्थ यह है कि अब जम्मू-कश्मीर का अपना कोई संविधान, झंडा और अपनी कोई दंड संहिता नहीं होगी। साथ ही, अब राज्य को यह भी तय करने का अधिकार नहीं होगा कि घाटी में कौन जमीन खरीद सकता है और कौन नहीं। इस तरह के सभी अधिकार संबंधित फैसले अब केंद्र द्वारा नियंत्रित किये जाएंगे।


विषेष दर्जा खत्म होने के बाद दूसरे राज्यों के लोगों के द्वारा जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने जैसी बातों को लेकर अमर्त्य सेन का कहना है कि, वहां के लोगों को इस बारे में फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा, इसका हक सिर्फ कश्मीरियों के पास ही होना चाहिए क्योंकि ये उनकी जमीन है.’ साथ ही उन्होंने घाटी में विपक्षी दलों के नेताओं के नजरबंद किये जाने की भी आलोचना करी है। इसपर उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता है कि आप वहां के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की आवाज सुने बिना न्याय कर पाएंगे.

बात दें की बीजेपी सरकार के घाटी को लेकर लिए गए निर्णय के कारन काफी लोगो द्वारा आलोचना की गई। आलोचना करने वाले लोगो की लिस्ट धीरे धीरे बढ़ती ही जा रही है। जो की शायद यह भी दर्शाता है की शायद कहीं ने कहीं सरकार द्वारा इतना बड़ा निर्णय लेते वक्त कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा गया। जो की उचित नहीं है।

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