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अनशन पर अण्णा हजारे, कहा 2014 चुनाव में भाजपा ने मेरा इस्तेमाल किया, पद्म भूषण लौटाने की बात कही।

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(Image Credits: NDTV)

भारत में समाजसेवी अण्णा हजारे राजनैतिक पार्टियों के खिलाफ करे गए धरना प्रदर्शन और अनशन के लिए जाने जाते हैं। अण्णा हजारे ने लोकपाल बिल को पास कराने के लिए दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर अनशन भी किया था।

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अण्णा हजारे वैसे तो किसी भी तरह की बयानबाजी दूर रहते हैं। लकिन बीते सोमवर 4 फरवरी को उन्होंने हैरान कर दिया जब उन्होंने बीजेपी पर यह आरोप लगाया की, भाजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उनका इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा की, यह तो सभी को पता होगा की लोकपाल को लेकर मेरी लड़ाई से किस तरह बीजेपी और आम आदमी पार्टी को सत्ता में आने में मदद मिली है। अब मेरे मन में इनके लिए कोई इज्जत नहीं बची है।

आपको बता दें की बीते कुछ दिनों से अण्‍णा हजारे, राज्य और केंद्र सरकार से अपनी मांगें मनवाने को लेकर अपने गांव रालेगण सिद्धि में भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

वहीं अण्णा हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप भी लगाया है, और कहा की वो लोगों को गुमराह कर रहे हैं और देश को तानाशाही की तरफ ले जा रहें हैं। इसके साथ उन्होंने महाराष्ट्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है की, महाराष्ट्र सरकार भी बीते चार सालों से राज्य की जनता से झूठ पर झूठ बोल रही हैं। सरकार का यह झूठ ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला, केंद्र और राज्य सरकार ने ने देश की जनता का भरोसा तोडा है।

अण्णा हजारे ने साथ यह भी कहा की राज्य सरकार कहती है की उनके (अण्णा हजारे) की 90 फीसदी मांगे मान ली गई हैं लेकिन यह एक बहुत बड़ा झूठ है। वह हमेशा कहते रहते है कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री अलग अलग मुद्दों पर बात करने मेरे पास भी आएंगे। लेकिन मैंने उन्हें पहले ही मना कर दिया है। अब मुझे उनपर कोई भरोसा नहीं रहा है और यही वजह है कि मुझे अब हर चीज लिखित में चाहिए।


अण्णा हजारे ने इन सभी मामलों से तंग आकर अपना पद्म भूषण पुरस्कार को लौटाने की बात भी कही है। बता दें की अण्‍णा हजारे बीते छह दिनों से अनशन पर हैं। उन्होंने रविवार को कहा था की अगर सरकार उनकी मांगो को नहीं मानती है तो वह पद्म भूषण पुरस्कार भी लौटा देंगे।

वहीं भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने अण्णा हजार का समर्थन किया है। और उनसे आग्रह किया है कि वो समाजवादी कार्यकर्त्ता जयप्रकाश नारायण की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करें।

हजारे ने केंद्र में लोकपाल और महाराष्ट्र में लोकायुक्त की तत्काल नियुक्ति और किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए बुधवार को अहमदनगर जिले में स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में अनशन शुरू किया था। हजारे ने रविवार शाम कहा, “अगर यह सरकार अगले कुछ दिनों में देश से किए अपने वायदों को पूरा नहीं करती है तो, मैं अपना पद्म भूषण लौटा दूंगा.” उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है.” 81 वर्षीय कार्यकर्ता को 1992 में तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया गया था।

 

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