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RBI ने जिस बैंक पर लगाया प्रतिबंध, निदेशकों के बीजेपी से संबध, एक BJP पूर्व विधायक के बेटे

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(image credits: thepost24.com)

अभी हाल ही में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉ-ऑपरेटिव (PMC) बैंक पर 6 माह के लिए ऑपरेश्नल प्रतिबंध लगाया। जिसके प्रभाव से इस अवधि के दौरान बैंक किसी को भी लोन भी नहीं दे सकता है। और बैंक के खाताधारक इस अवधि के दौरान बैंक से सिर्फ 10,000 रुपए से अधिक नहीं निकाल सकेंगे।

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बता दे की जिस बिल्डिंग में पीएमसी बैंक का ऑफिस है, उसे वाधवा द्वारा प्रमोटेड हाउसिंग डेवलेपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) द्वारा विकसित किया गया है। हालांकि बैंक और HDIL कंपनी के बीच का संबंध इससे भी आगे का है।

वहीं इस मामले में एक और बात सामंने आती दिख रही है। दरअसल आरबीआई द्वारा पीएमसी बैंक पर प्रतिबंध लगाने के बाद इस धांधली के तार भाजपा नेताओं के साथ भी जुड़ रहे हैं। बता दे की बैंक के एक निदेशक रजनीत सिंह, बैंक में सह-निदेशक के पद पर हैं। और मुंबई के मुलुंड से 4 बार भाजपा विधायक रह चुके हैं। रजनीत खुद भी भाजपा के सदस्य हैं।

बता दे की रजनीत सिंह के अलावा बैंक के 12 अन्य निदेशकों का भी भाजपा से जुड़ाव होने की बात सामने आ रही है। हालाकिं इस मामले उनका कहना है की बैंक में हुई गड़बड़ के साथ उनका कोई लेना-देना नहीं है।

मालूम हो की पीएमसी बैंक, कंपनी के लिए इन-हाउस बैंकर के रुप में काम कर रहा था। बता दें कि HDIL कंपनी इन दिनों नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही है।


देखने वाली बात यह है कि जब HDIL कंपनी दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही थी, उस दौरान पीएमसी बैंक द्वारा कंपनी को 96.50 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। हालांकि बैंक के एमडी जॉय थॉमस का कहना है कि बैंक के पास राकेश वाधवा के बेटे और एचडीआईएल कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी सारंग वाधवा की निजी गारंटी के साथ ही जमानत राशि पर्याप्त मात्रा में जमा है।

यहाँ देखने वाली बात है की क्या मौजूदा सरकार PMC बैंक से बीजेपी नेताओं के संबध को नकार देगी। हालाँकि बैंक के निदेशक रजनीत सिंह ने बैंक में हुई धांधली से उनके सम्बन्ध होने से इंकार किया है। खैर इसके पीछे जो भी सच्चाई है वह तो जांच होने पर ही सामने आ सकेगा। वहीँ अब देखना यह होगा की क्या मौजूदा सरकार इस पर कोई जांच करेगी। कमाल की बात तो यह है की इस मामले में बैंक के निदेशक द्वारा कुछ कहने से इंकार कर देना अजीब लगता है।

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