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भीमा कोरेगांव: लाखों दलितों के जुटने की उम्मीद, पुलिस की कड़ी सुरक्षा और ‘भड़काऊ’ सोशल मीडिया पोस्ट पर रहेगी नजर

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(Representational Image) (Image Credits: India Today)

2019 में कोरेगांव की लड़ाई की 201 वीं वर्षगांठ पूरी हो जाएगी। और इसी कारण इस मौके पर महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव गांव में किसी भी तरह की हिंसा से बचने के लिए पिछले वर्ष की तुलना में 10 गुना ज़्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती करी गई है।

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हर साल 1 जनवरी को पुरे महाराष्ट्र में हजारो दलित पुणे से 40 किलोमीटर दूरी पर भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक पर इकट्टा होते हैं। यह दिन ब्रिटिश सेना की ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है। पिछले साल 2018 में भीमा कोरेगांव की 200 वीं वर्षगांठ थी। इसके कारण गांव में लोगो की भीड़ बहुत इकठ्ठा हो गई थी जिन पर कथित रूप से दक्षिणपंथी समूहों के लोगों ने हमला कर दिया था।

इस बार भी राज्य भर दलित समूहों के यहां पर इकठ्ठा होने की उम्मीद जताई गई है। एक सयुंक्त सवांददाता सम्मेलन में डीएम नवल किशोर और आईजी विश्वास नागरे पाटिल में कहा कि, ‘इस कारण से वहां पर ‘कम से कम 5,000 पुलिसकर्मी, 1,200 होमगार्ड और 200 स्वयंसेवक होंगे. यहां 35 सार्वजनिक घोषणा प्रणाली, 40 वीडियो कैमरा, 12 ड्रोन और 306 सीसीटीवी कैमरे होंगे. हम 10 लाख की भीड़ के लिए तैयार हैं.’

पाटिल ने आगे कहा कि, ‘इस तरह की संवेदनशील घटना के लिए, सोशल मीडिया अक्सर आग में घी डालने का काम करती है.’ ‘इसे ध्यान में रखते हुए, राज्य भर की विभिन्न टीमें भीमा कोरेगांव के संबंधित मैसेज और पोस्टों पर बारीकी से निगरानी रखे हुए है. उन्होंने कहा कि, ‘हम 15 नवंबर से उनकी निगरानी कर रहे हैं. लेकिन नफरत भरे संदेश अब नहीं आ रहे हैं.’

प्रशासन, अफवाह फ़ैलाने से रोकने के लिए भीमा कोरेगांव में इंटरनेट सेवाओं कोबन्द करने पर विचार कर रहा था। लेकिन इससे मीडिया भी प्रभावित होती और वहां हो रहे है कामों से वंचित रह जाती। युद्ध स्मारक के 100 मीटर के अंदर किसी भी भाषण की अनुमति नहीं होगी।


चंद्रशेकर आजाद को लिया हिरासत में:

मुंबई पुलिस ने 27 दिसंबर को चैत्यभूमि से जहां डाली आइकन बीआर अंबेडकर का अंतिम संस्कार किया गया था वहां से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को हिरासत में लिया था। जिला कलेक्टर नवल किशोर राम ने कहा कि उन्हें भीमा कोरेगांव में एक रैली आयोजित करने के लिए आजाद की तरफ से कोई अनुरोध नहीं मिला है।

इसके आलावा पाटिल ने कहा कि राज्य ने दंड प्रक्रिया संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अब तक 1211 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस बारे में कहना है कि, ‘भीमा कोरेगांव में आने से कम से कम 64 लोगों को प्रतिबंधित किया गया है और छह लोगों को बाहर कर दिया गया है.’

ये निवारक कार्रवाई किस आधारपर करी गई है इसके संबंध में पूछे जाने पर आईजी नांगरे पाटिल ने कहा कि अधिकारियों ने विभिन्न एजेंसियों से गोपनीय इनपुट पर कार्रवाई की थी। उन्होनें उन लोगों या संगठनों का नाम लेने से मना कर दिया जिनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करी गई थी। इसक साथ पुलिस ने भीमा कोरेगांव में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी अपनी नजर बनाए रखेगी।

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