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केंद्र ने 30 गुना बढ़ाई दलित छात्रों की फीस, वहीं सवर्ण छात्रों कि सिर्फ इतनी बढ़ी फीस

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केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है जिसके कारण काफी बवाल मच गया है। हाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने SC और ST छात्रों के लिए कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं की फीस 50 रुपये से बढ़ाकर सभी वर्गो के लिए 1,500 रुपये कर दी है, दलित की हितेषी बनने का दिखावा करने वाली केंद्र सरकार ने दलित छात्रों की परीक्षा फीस को 30 गुना बढ़ा दिया है।

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पहले ऐसी खबर थी कि सामान्य कैटिगरी की फीस 750 रुपये से 1500 रुपये और एससी-एसटी के लिए 50 से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दी गयी है जबकि अब सभी को 1500 रुपये की फीस देनी पड़ेगी इसमें दलित छात्रों को कोई छूट नहीं दी गई है। 

आपको बता दे की कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले छात्रों को कक्षा 9 में ही बोर्ड के लिए रजिस्ट्रशन करवाना पड़ता है और कक्षा 12 के छात्रों का कक्षा 11 में रजिस्ट्रशन किया जाता है। बोर्ड ने पिछले हफ्ते फीस में बदलाव की अधिसूचना जारी की है। बोर्ड ने उन स्कूलों से पूछा है जिन्होंने पहले से ही  रजिस्ट्रशन प्रक्रिया शुरू कर दी थी और छात्रों से पुरानी फीस स्ट्रक्चर के अनुसार फीस लिया था, वे फीस के अंतर को वसूल सकते हैं।

संशोधित मानदंडों के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को पांच विषयों के लिए 1,500 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि पहले उन्हें उसके लिए 50 रुपये का भुगतान करना होता था। यानी उनके लिए फीस बढ़ोतरी 30 गुना बढ़ गई है। जनरल कटेगरी के छात्र जो पहले पांच विषयों के लिए 750 रुपये भुगतान करते थे, उन्‍हें अब 1500 रुपये भुगतान करना होगा। सीबीएसई के सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह फीस कक्षा 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाओं पर लागू होगी।  

कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में एक अतिरिक्त विषय के लिए उपस्थित होने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को जो पहले कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता था, उन्हें अब 300 रुपये और का भुगतान करना होगा। सामान्य श्रेणी के छात्रों को भी अतिरिक्त विषय के लिए 300 रुपये का भुगतान करना होगा, पहले इसके लिए 150 रुपये का भुगतान करना होता था। 


100 प्रतिशत दृष्टिहीन छात्रों को सीबीएसई परीक्षा शुल्क का भुगतान करने से छूट दी गई है। जो छात्र अंतिम तिथि से पहले सीबीएसई परीक्षा शुल्क के अंतर जमा करने में विफल रहते हैं, उनको रजिस्‍टर्ड नहीं किया जाएगा और उन्‍हें 2019-20 परीक्षा में उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। माइग्रेशन फीस जो पहले 150 रुपये थी, उसे भी बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया गया है।विदेश में CBSE स्कूलों में नामांकित छात्रों को कक्षा 10 और 12 दोनों के लिए पांच विषयों के लिए 10,000 रुपये का भुगतान करना होगा। पहले यह फीस 5000 रुपये थी। उनके लिए कक्षा 12 में एक अतिरिक्त विषय की फीस 2,000 रुपये तय की गई है, जबकि पहले यह फीस 1,000 रुपये थी। 

बाद में CBSE ने स्‍पष्‍ट करते हुए बताया है कि बोर्ड परीक्षा की फीस पूरे भारत में बढ़ाई गई है, न की कि केवल दिल्‍ली में। फीस में यह बढ़ोतरी पांच साल बाद की गई है। फीस में यह बढ़ोतरी सीबीएसई से जुड़े भारत और विदेश के सभी श्रेणियों के छात्रों के लिए की गई है। शेष भारत के सभी छात्रों के लिए परीक्षा शुल्‍क को 750 रुपये बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है।केवल दिल्ली में विशेष व्यवस्था थी, जहां एससी-एसटी छात्रों के लिए फीस 350 रुपये हुआ करती थी। 350 रुपये में से एससी-एसटी छात्रों को केवल 50 रु देना होता था, जिसमें से 300 रुपये का भुगतान दिल्‍ली सरकार द्वारा किया जाता था।

केंद्र सरकार के द्वारा बढ़ाए गए फीस का असर कई लोगो पर पड़ने वाला है जहा दलित समुदाय के लिए सरकार के द्वारा छूट प्राप्त थी उसमे सीधे तौर पर 30  गुना की बढ़ोतरी कर दी गई ही। गरीब तबके से आने वाले बच्चो के परिवारों के लिए यह एक बोझ डालने वाला फैसला है। 

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