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मुख्यमंत्री योगी ने पुलवामा घटना पर सवाल पूछने पर 7 अध्यापकों को किया निलंबित

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(Image Credits: Scroll.in)

हाल ही में करीब एक महीने पहले जम्मू कश्मीर में CRPF काफीले के साथ हुई घटना के कारण पूरा देश आहत हुआ था। वहीं इस घटना पर देश में कुछ विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस घटना के समय को लेकर सवाल उठाये थे।

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इसके साथ कई विपक्षी पार्टियों ने इस घटना में सरकार द्वारा लापरवाही बरतने पर सरकार की खूब आलोचना भी की थी। एक तरफ राजनीतिक पार्टियों के नेताओ के साथ साथ देश की आम जनता ने भी इस पर सवाल उठाये थे। वहीं उस दौरान लोगो द्वारा सवाल उठाए जाने पर सरकार द्वारा उनको देश द्रोही के नजरिये से भी देखा गया।

ऐसा ही कुछ मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है, जहां पुलवामा में हुई घटना पर सवाल उठाये जाने पर 7 स्कूल अध्यापको को योगी सरकार ने निलंबित कर दिया है। अध्यापको ने सवाल उठाने के साथ साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तारीफ भी की थी। ऐसा करना उनकी अपनी राय हो सकती है, परन्तु प्रदेश सरकार द्वारा उनको सवाल उठाये जाने पर निलंबित कर देना उचित नहीं है।

बताया जा रहा है अध्यापकों ने अपने वॉट्सऐप ग्रुप और फेसबुक पेज पर इन मुद्दों से संबंधित पोस्ट किए थे। निलंबित होने वालों में एक बेसिक शिक्षा अधिकारी और एक ग्रुप-ए एजुकेशन सर्विस ऑफिसर भी शामिल है। इन दोनों को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए निलंबित किया गया। इसके अलावा सरकार ने एक प्राइवेट स्कूल टीचर के खिलाफ भी केस दर्ज करने का आदेश दिया है।

इस संबंध में उत्तर प्रदेश के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी (बेसिक एजुकेशन) प्रभात कुमार ने बताया कि बीएसए को निलंबित करने से पहले पूरी जांच की गई थी।वहीं, टीचरों के निलंबन के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह कार्रवाई संबंधित जिलों के बीएसए ने की होगी।


अब हम आपको उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा अध्यापकों के सवाल उठाये जाने पर निलंबित किये गए अध्यापकों के बारे में बता देते है। यहां हम निलंबित हुए 7 अध्यापकों में से सिर्फ 3 लोगो के बारे में बताने वाले है। जिनके नाम दिनेश यादव बीएसए मुजफ्फरपुर से और बारांबकी से प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर सुरेंद्र कुमार तथा सुलतानपुर से प्राइमरी स्कूल के अस्सिस्टेंट टीचर अमरेंद्र कुमार है।

मुजफ्फनगर में अध्यापक दिनेश यादव बीएसए को विशेष सचिव आनंद कुमार सिंह ने 21 फरवरी को निलंबित किया। उन पर आरोप है की उन्होंने 19 फरवरी को एक वॉट्सऐप ग्रुप पर जम्मू कश्मीर में CRPF काफिले के साथ हुई घटना पर सवाल उठाए थे। साथ ही, इस हमले में साजिश होने की आशंका जाहिर की थी। दिनेश द्वारा ऐसा करने पर की उन्हें उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन माना गया। वहीं दिनेश यादव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की मैं ग्रुप में अपने एक दोस्त से बात कर रहा था। मैंने सरकारी सेवा के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया। मैंने अपना जवाब अधिकारियों को सौंप दिया है।

अध्यापक सुरेंद्र कुमार जिन्हे 27 फरवरी को बाराबंकी के बीएसए वीपी सिंह द्वारा निलंबित किया गया। सुरेंद्र ने टीचर्स के एक ग्रुप में बाकि टीचर की तरह ही उसी घटना को लेकर पोस्ट किया था और एक आम आदमी के तरह उन्होंने भी इस घटना पर सवाल उठाए थे। सुरेंद्र पर भी सर्विस रूल्स के उल्लंघन का आरोप है। सुरेंद्र का कहना है कि मैंने अधिकारियों को जवाब दे दिया है। मेरा निलंबन गलत है।

सुल्तानपुर से प्राइमरी स्कूल असिस्टेंट टीचर अमरेंद्र कुमार को सुल्तानपुर के बीएसए ने 2 मार्च को निलंबित किया। अमरेंद्र कुमार पर भी आरोप है की उन्होंने टीचर्स के वॉट्सऐप ग्रुप पर इमरान खान को सैल्यूट करते हुए शांति का मसीहा बताया था। जिसके कारण उन पर सर्विस रूल्स के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। अपने निलंबन पर उन्होंने कहा, मुझे चार्जशीट मिल गई है। मैंने किसी भी सर्विस रूल्स का उल्लंघन नहीं किया। मैं जांच अधिकारी को अपना जवाब देने के लिए तैयार हूं।

जम्मू कश्मीर में 14 फरवरी को हुई घटना से पूरा देश शर्मशार है। और इसके साथ देश यह भी चाहता है की जिसने भी इसको अंजाम दिया है। सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करे। परन्तु लोगो द्वारा इस पर सवाल पूछे जाने पर सरकार द्वारा उन पर इस प्रकार की करवाई करना उचित नहीं है। लोकतंत्र में सरकार सवाल पूछने से किसी को मना नहीं कर सकती है। सरकार को यह समझना चाहिए उनके ऐसा करने से देश की जनता पर उनका गलत प्रभाव पड़ेगा।

बीजेपी सरकार अक्सर ही ऐसा करती आई है जब भी कोई उनसे सवाल पूछने की कोशिश करता है, तो सरकार उनको दबाने या फिर उनपर करवाई करने से पीछे नहीं हटती है। हमें ये समझ नहीं आता है की जनता के सवाल पूछे जाने पर मौजूदा सरकार पर कौन सी विपत्ति आन पड़ती है। आखिर ऐसा करके मौजूदा सरकार क्या दिखाना चाहती है।

वैसे कहा यह जाता है की मौजूदा सरकार हर उस सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं समझती जिसमे उनकी खामिया का पता चलता है। और इसके साथ साथ सरकार उन सवालों का भी जवाब नहीं देती। जिससे सरकार को लगता है ऐसा करने से जनता के सामने उनका कोई बड़ा राज सामने आ सकता है।

लेकिन लोकतंत्र में लोगो द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को जनता के हर सवालों का जवाब देना उसका दायित्व बनता है। और अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो हमे यह समझ लेना चाहिए की, भविष्य में लोकतंत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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