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जम्मू-कश्मीर पर CJI का बड़ा बयान, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल से हालातो पर माँगा विवरण

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(image credits: hindustan times)

लगभग एक महीने पहले मौजूदा सरकार ने घाटी से विशेष दर्जा हटाने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले पर कुछ विपक्षी पार्टिया उनके मंशे पर सवाल खड़े करने लगे। इसके विपरीत कुछ दलों ने सरकार का समर्थन भी किया। फैसले से नाराज लोगो ने इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दाखिल की। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का बयान सामने आया है।

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CJI ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ेगी तो मैं खुद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से एक रिपोर्ट मांगी है. इस रिपोर्ट को देखने के बाद अगर मुझे लगा कि वहां जाना चाहिए तो मैं खुद हाईकोर्ट जाऊंगा।

इस मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने सरकार से पूछा कि आखिर जम्मू-कश्मीर में हालात को सामान्य करने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं उसकी जानकारी दी जाए। चीफ जस्टिस द्वारा पूछे गए सवाल पर केंद्र सरकार ने जवाब में कहा की, कुछ स्थानीय बैन लगे हुए हैं। वहीं इसके साथ साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हालात सामान्य करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कश्मीर में अगर तथा-कथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा निपटाया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए कहा, कश्मीर में स्थित सभी समाचार पत्र चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है. प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं।

केंद्र द्बारा दिए गए जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल से कहा कि इन हलफनामों का विवरण दें और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रयास किए जाएं।


देखा जाये तो सरकार के फैसले से नाराज लोगो द्वारा दिए गए याचिकाओं पर आखिर में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने को तैयार हो गया है। बता दे की पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने यचिका को किसी कारण से ख़ारिज कर दिया था। अब देखना यह होगा की केंद्र सरकार घाटी के मौजूदा हालातो का किस प्रकार विवरण देती है। साथ ही यहाँ देखने वाली बात यह भी होगी की इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की सुनवाई के बाद क्या परिणाम आते है।

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