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जम्मू कश्मीर के लोगों को राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ना अगला कदम होगा : आरएसएस वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार

Connecting-the-people-of-Jammu-and-Kashmir-with-the-spirit-of-nationalism-will-be-the-next-step:-RSS-senior-leader-Indresh-Kumar
(image credits: hindustan times)

घाटी से विशेष दर्जे हटने के बाद मौजूदा सरकार से जुड़ें लोग इसे अहम फैसला बता रहे है। वहीं विपक्षी पार्टियों के नेता इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। दूसरी और कुछ विपक्षी दलों ने सरकार के इस निर्णय का समर्थन किया है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद आय दिन कोई न कोई बयानबाजी सुनने को मिल रही है।

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वहीं अब आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने भी इस संदर्भ में बयान दिया है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद अब अगला कदम राज्य के लोगों को भारतीयता एवं राष्ट्रवाद के विचारों से जोड़ने की दिशा में उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा की, देश के मुसलमानों ने एक राष्ट्र, एक ध्वज, एक संविधान और एक नागरिकता के सिद्धांत को स्वीकार किया है, जिसका देश के सभी लोग अनुसरण करते हैं. यह एकमात्र रास्ता है, जिससे घाटी का विकास हो सकता है.’

बता दें की आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार, बीते 18 वर्षों से घाटी में काम किया है और जम्मू कश्मीर में 30 अलग-अलग संस्थानों का संचालन भी करते हैं। इंद्रेश कुमार ने कहा जम्मू, लद्दाख और कश्मीर घाटी में रहने वाले लोगो में एक-चौथाई लोग अनुच्छेद 370 हटाए जाने से खुश है।

वह बताते है की , जम्मू कश्मीर की लगभग दो-तिहाई आबादी अनुच्छेद 370 हटाए जाने से खुश है. जम्मू कश्मीर के पंडितों, डोगरा, सिखों, शिया मुसलमान, गुर्जर और दलितों के साथ न्याय हुआ है। घाटी के कुछ स्वयंभू नेताओं के द्वारा लोगो को भ्रमित किया जा रहा है।


कुमार ने कहा, ‘जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमें अब यहां के लोगों को राष्ट्रवाद और राष्ट्रहित की अवधारणा से जोड़ने की दिशा में काम करना होगा.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने संगठनों के माध्यम से हाल में राज्य के तमाम लोगों से मुलाकात की है और अब उनके दो संगठन तमाम प्रशासनिक लोगों से उन विषयों पर बातचीत कर रहे हैं। जिनके माध्यम से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया जा सके।

आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने आगे कहा, ‘कश्मीरी मुसलमानों का एक भाग शांति और विकास चाहता है और यह सिर्फ भारत ही उसे दे सकता है।

आरएसएस नेता द्वारा सरकार के फैसले का समर्थन करना उनकी अपनी पसंद हो सकती है, और हम उसपर कोई टिप्पणी भी नहीं करना चाहते है। लेकिन इसके साथ ही वह घाटी के लोगो को राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ने की बात कर रहे है। जो की सुनने में अटपटा लगता है। उन्हें यह मालूम होना चाहिए की किसी भी व्यक्ति में आप राष्ट्रवाद की भावना उजागर नहीं कर सकते है। बल्कि इस तरह की भावनाये व्यक्ति में स्वयं ही आती है।

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