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पाँच महीनों से नहीं मिला दलित छात्र-छात्राओं को आवास का पैसा

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ग्वालियर के कॉलेज में पढ़ने वाले दलित छात्र-छात्राओं को आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा दिए जाने वाली राशि उन तक पहुंची ही नहीं। छात्र-छात्राओं को दो हजार रुपए प्रतिमाह के रूप में उनकी आर्थिक सहायता के तौर पर उन्हें दिए जाते थे पर इस बार इस कई महीनो से राशि का भुगतान ही नहीं किया गया। छात्रों ने बताया की एक साल का 24 हजार रुपए दिया जाता है जिसका अभी तक भुगतान नहीं किया गया। आपको बता दे की सरकारी या निजली काॅलेजों में पढ़ने वाले नियमित स्टूडेंट्स को ही यह राशि दी जाती है। यह पैसे सीधे तौर पर छात्र के बैंक अकाउंट में विभाग के द्वारा भेजी जाती है।

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कॉलेज में दाखिला लेने के एक वर्ष के बाद ही यह राशि दी जाती है। और आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा यह देखा जाता है की विद्यार्थी कॉलेज में नियमित छात्र के रूप में परीक्षा देता है तो जून या जुलाई में अगले वर्ष यह राशि उसके खाते में डाल दी जाती है। जिससे वह अपना अगले सत्र का खर्चा उठा सकता है।

पांच महीनों से नहीं मिली राशि

छात्र-छात्राओं का कहना है की यह राशि उनके लिए काफी मह्त्वपूर्ण है और पांच महीनो से पैसे न मिलने के कारन उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज छात्रों का कहना है कि पांच महीने हो गए लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला, जबकि विभाग के पास बजट उपलब्ध है। जब भी जाते हैं तो संबंधित अफसर कोई न कोई बहाना बनाकर हमे चलता कर देते है।

कई छात्रों ने बताया की पैसे न मिलने की वजह से उन्हें मकान का किराया देने में काफी दिक्कतों का सामना करना पद रहा है मकान मालिक बार बार किराये की लिए टोकते है और मकान खली करने के लिए बोलते है। हमे लगा था की जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। और न ही कोई अफसर इस बारे में बात करने के लिए राज़ी हैँ।

यह है योजना

कॉलेजों में पढ़ने वाले आरक्षित वर्ग के छात्रों को ट्यूशन फीस और छात्रवृत्ति का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। और यह भुगतान कॉलेज में दाखिला लेने के एक वर्ष के बाद किया जाता है। पहले यह राशि सीधे तौर पर कॉलेज में जमा हो जाती थे फिर वहा से छात्रों को दी जाती थी। भुगतान के समय होने वाले घोटालो को देखते हुए सरकार ने यह राशि सीधे छात्रों के खातों में भेजना शुरू कर दिया। इसके अलावा गांवों और छोटे कस्बों से जिला मुख्यालय पर आकर पढ़ने वाले छात्रों को इस योजना के तहत किराए से मकान या कमरा लेने के लिए पैसा भी मिलता है।


बहाना बनाकर हमें लौटा देते हैं अधिकारी

छात्रों ने यह कहा की आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर हमे लौटा देते है। विभाग ने पहले भी यह दावा किया था की जुलाई में भुगतान कर दिया जायेगा पर ऐसा न हुआ , अब हम पढ़ाई करें या फिर पैसे के लिए विभाग के चक्कर लगाएं, समझ नहीं आ रहा।

छात्रों को आवास तक का पैसा नहीं दिया गया। जिसका प्रमुख कारण यह था नोडल एजेंसी से इन छात्रों की रिपोर्ट हमारे पास नहीं आई है। नोडल एजेंसियों को छात्रों ने पत्र भी लिखे अब उन्होंने फिर से रिमांइडर भेजा है ताकि जल्द से जल्द वह वेरीफिकेशन कर रिपोर्ट भेजें। और आवास का पैसा छात्रों तक पहुँच सके।

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