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तिहाड़ जेल के मुस्लिम कैदी का आरोप, जेलर ने पीठ पर गोदकर लिखा ‘ओम’

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दिल्ली में स्थित तिहाड़ जेल से अक्सर कैदियों के साथ घटनाये होने की खबर सामने आती है। अपने से छोटे कैदियों के साथ बदसुलूकी करने और उनको प्रताड़ित करने की खबर अक्सर जेल से आती है। परन्तु इस बार तिहाड़ जेल से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कैदी के साथ किसी अन्य कैदी ने  नहीं बल्कि यहाँ खुद पुलिस वाले ने व्यहवहार किया है।
तिहाड़ जेल के एक कैदी का आरोप है कि जेलर (जेल सुपरिटेंडेंट) ने उसकी पीठ पर ‘ओउम’ का टैटू बना दिया है। यह बात तब सामने आयी जब कैदी ने जज के सामने अपनी टी-शर्ट उतारकर अपनी पीठ पर बना ऊँ का निशान दिखाया और कहा कि यह निशान जेल निरीक्षक ने जबरन दागा है।

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हथियाराें की तस्करी में गिरफ्तार आर्म्स डीलर नब्बीर उर्फ पाेपा ने दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में अपनी शर्ट निकालकर निशान दिखाया। इस कैदी का कहना है कि उसे मुस्लिम होने की ये सजा दी गई है। नब्बीर को न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के लिए गुरुवार काे काेर्ट में पेश किया गया था। नब्बीर ने काेर्ट काे तिहाड़ जेल पुलिस पर मारपीट करने, गर्म धातु से ओम दागने और जबरन उपवास रखवाने के आराेप लगाए। कैदी के मुताबिक, यह 17 अप्रैल की घटना है। 


मजिस्ट्रेट रिचा पाराशर ने लॉकअप के अंदर ही कैदी की पीठ पर दागे गए ओम के निशान के फोटो खिंचवाए औैर तिहाड़ प्रशासन को 24 घंटे में जवाब देने का आदेश दिया। नब्बीर पूर्वी दिल्ली के न्यू सीलमपुर इलाके का रहने वाला है औैर हथियार सप्लाई मामले में साल 2016 गिरफ्तारकिया गया । उसे जेल नंबर 4 के ज्यादा जोखिम वाले वार्ड में रखा गया था। घटना सामने आने के बाद उसे जेल नंबर 4 से जेल नंबर 1 के हाई सिक्योरिटी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। 


नब्बीर  के पीठ पर ओउम जेल अधीक्षक के चेंबर में दागा गया था। चैंबर में ही जोत जल रही थी और वहां ओम निशान वाली धातु रखी भी थी। जेल अधीक्षक का सेवादार भास्कर भी साथ था। उसी ने जेल अधीक्षक के कहने पर दागने में मदद की। मामले की जांच जी जिम्मेदारी जेल के एआईजी राजकुमार को दी गई है। 2 हफ्ते में जांच रिपोर्ट देनी है। तिहाड़ में इससे पहले एक बार एक कैदी के निजी अंगों को गर्म पानी से जलाने का मामला सामने आया था।


जेल में ही कैदियों के साथ इस प्रकार के व्यवहार होने के चलते जेल निरीक्षकों पर सवाल उठने लगे है। कैदी का कहना है कि उसे मुस्लिम होने की ये सजा दी गई है। क्या यह सच है की मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शख्श के साथ इस प्रकार का बर्ताव किया गया ? या फिर कैदी पर इस प्रकार का जुल्म सिर्फ आपसी मामला है।


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