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NCERT की किताबों से हटाया गया भारत में जातीय भेदभाव संबंधित पाठ्यक्रम

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(Image Credits: The Indian Express)

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ एनसीईआरटी ने नौवीं क्लास की इतिहास की किताब से भारत में जातीय भेदभाव से संबंधित तीन चैप्टर हटा दिए हैं। इन चैप्टरों में से एक में केरल की दलित महिलाओं के कथित ऊंची जाति के लोगों से संघर्ष की कहानी बताई गई थी।नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT ने अपनी ओछी मानसिकता को दिखाते हुए। किताबी से दलित महिलाओ के सवर्णो के खिलाफ संघर्षो की कहानी को हटा रही है।

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18वीं सदी के आसपास त्रावणकोर में ‘नादर’ समुदाय की महिलाओं को अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा खुला रखने के लिए मजबूर किया जाता था. तक़रीबन 50 साल के लगातार संघर्ष के बाद नादर महिलाओं को अपना शरीर ढंकने का हक़ मिला. हालांकि ईसाई मिशनरियों से प्रभावित होकर नादर महिलाओं ने ब्लाउज पहनना शुरू करके इस कुप्रथा का विरोध करना शुरू कर दिया.

भारत और समकालीन विश्व – I शीर्षक वाली पाठ्यपुस्तक से लगभग 70 पेज हटाने का निर्णय NCERT के अनुसार छात्रों पर बोझ को कम करने के लिए किया गया है। यह मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा शुरू किए गए पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने के अभ्यास का हिस्सा है। यह सरकार की अगुवाई में की गई दूसरी पाठ्यपुस्तक समीक्षा है।

नया शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले, संशोधित किताबें इसी महीने आएंगी। 2017 में NCERT ने 182 किताबों में 1,334 बदलाव किए, जिसमें करेक्शन और डेटा अपडेट शामिल थे।किताब से जिस चैप्टर को हटाया गया है, उसमें लिखा था:

“मई, 1822 में नायर समाज (तथाकथित ऊंची जाति) के लोगों ने त्रावणकोर में नादर महिलाओं पर सरेआम हमला किया था. ऐसा इसलिए क्योंकि नादर महिलाओं ने उनके बनाए नियमों के ख़िलाफ़ अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ढंक रखा था. इसके कई दशकों के बाद हिंसक संघर्ष की वजह से आख़िरकार इस ‘ड्रेस कोड’ का अंत हुआ.” इंडियन एक्सप्रेस सूत्रों के हवाले से लिखता है कि जावडेकर का एनसीआरटी को सुझाव ये था कि सभी विषयों का सिलेबस (पाठ्यक्रम) कम किया जाए लेकिन एनसीईआरटी ने सामाजिक विज्ञान का सिलेबस लगभग 20% कम कर दिया.


टाए गए तीन चैप्टरों में से, एक (वस्त्र: एक सामाजिक इतिहास) कपड़ों पर है, सामाजिक आंदोलनों ने कैसे कपड़े पहने को प्रभावित किया इस पर है। दूसरा चैप्टर (इतिहास और खेल: क्रिकेट की कहानी) भारत में क्रिकेट के इतिहास और जाति, क्षेत्र और समुदाय की राजनीति से इसके कनेक्शन पर है। तीसरा अध्याय (खेतिहर और किसानों) पूंजीवाद के विकास पर केंद्रित है और उपनिवेशवाद ने खेतिहर और किसानों के जीवन को कैसे बदल दिया।

वहीं, दूसरी तरफ़ गणित और विज्ञान के सिलेबस में सबसे कम कटौती की गई है. एनसीईआरटी का कहना है कि ये बदलाव छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की एक लाख से ज़्यादा राय मिलने पर किए गए हैं. दिलचस्प ये है कि इन्हीं बदलावों के तहत एनसीआईरटी ने आठवीं कक्षा की हिंदी की किताब में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लिखी एक कविता शामिल की है.

किताब में यह कविता केंद्र सरकार के सुझाव के बाद शामिल की गई है. सरकार का कहना है कि ये भूतपूर्व प्रधानमंत्री के योगदान और उपलब्धियों को ज़िंदा रखने की एक कोशिश है.

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