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विधानसभा चुनाव 2018 : क्या दलित समुदाय के गुस्से ने गिराई बीजेपी की सत्ता?

India Caste Protest

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणामो के बाद भारतीय जनता पार्टी की सत्ता पर लोगो ने कर्रारा प्रहार किया है। भले ही तीन राज्यों में अध्यक्ष राहुल गाँधी के चुने हुए मुख्यमंत्री शपथ ले चुके हैं। वही बीजेपी को तीनो राज्यों के ग्रामीण इलाके के लोगो ने नकार दिया है। तीन राज्यों की कुल ग्रामीण सीटों की संख्या 424 है जिसमे में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ 153 सीट ही मिल पाई है। वही कांग्रेस ने 236 सीटों पर कब्ज़ा जमाया है।

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इतना ही नहीं बीजेपी की आरक्षित सीटों पर भी लोगो ने उन्हें नकार दिया है। 2013 के विधानसभा चुनावों में तीनों राज्यों की कुल 78 में से 68 सीटें बीजेपी के पास थी हालांकि 2018 में ये आंकड़ा घटकर सिर्फ 31 रह गया। वही बसपा की भी पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार वोट प्रतिशतो में वृद्धि देखने को मिली है।

जानकारों के मुताबिक एससी/एसटी एट्रोसिटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2 अप्रैल को हुए भारत बंद में हुई हिंसा की घटनाओं से विधानसभा चुनाव पर काफी असर देखने को मिले है। यह सभी घटनाये किसी ने किसी रूप में एक बड़ा कारण बानी है भारतीय जनता पार्टी के हार का। जबकि इस साल की शुरुआत में ही CSDS के सर्वे में तीनों राज्यों में 22% दलितों ने बीजेपी के पक्ष में अपनी राय दी थी और कांग्रेस 23% के साथ सिर्फ 1% से ही आगे थी।

अनुसूचित जातियां क्यों नाराज़ हैं ?

बढ़ती दलितों पर अत्याचार की घटनाओ को देखते हुए दलित समाज में मौजूदा सरकार के प्रति गुसा पैदा होने लगा वही राजस्थान, गुजरात और यूपी में कई जगहों पर दलितों के साथ हुई अत्याचार की घटनाओं के बाद खुद पीएम नरेंद्र मोदी को सामने आकर कहना पड़ा था कि ‘मेरे दलित भाइयों पर वार करना बंद कीजिए, अगर वार करना है तो मुझ पर हमला कीजिए। इन सभी घटनाओ को देखते हुए विपक्ष ने भी इन मुद्दों को हथियार की तरह ही प्रयोग किया।

Dalitprotest

Image Credit: Open Magzine


बीजेपी अपना प्रेम लगातार दिखाती रही है लेकिन, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद सवर्णों के निशाने पर आई मोदी सरकार कई अनुसूचित जातियों के नेताओं की नाराजगी झेल रही है। इंडियन जस्टिस पार्टी के संस्थापक रहे उदित राज ने मोदी सरकार से आरक्षण के मुद्दे को लेकर नाराज़गी जताई थी। वही उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज से बीजेपी सांसद छोटेलाल खरवार भी सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार से नाराज़गी जताई थी उन्होंने पीएम मोदी को चिट्टी लिख यह कहा की सीएम ने उन्हें डांटकर भगा दिया था।

दलित समाज की राजनीती की ताकत

भारत देख में दलित समुदाय की राजनीती के पक्ष से देखी जाये तो क्कोई भी पार्टी बिना दलित समुदाय के सपोर्ट के बन ही नहीं सकती देश की कुल जनसंख्या में 20.14 करोड़ दलित हैं। देश में कुल 543 लोकसभा सीट हैं. इनमें से 84 सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। दलित आबादी वाला सबसे बड़ा राज्य पंजाब है. यहां की 31.9 फीसदी आबादी दलित है और 34 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं। वही

भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में करीब 20.7 फीसदी दलित आबादी है। राज्य की 17 लोकसभा और 86 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। हिमाचल में 25.2 फीसदी, हरियाणा में 20.2 दलित आबादी है. एमपी में दलित समुदाय की आबादी 6 फीसदी है जबकि यहां आदिवासियों की आबादी करीब 15 फीसदी है. पश्चिम बंगाल में 10.7, बिहार में 8.2, तमिलनाडु में 7.2, आंध्र प्रदेश में 6.7, महाराष्ट्र में 6.6, कर्नाटक में 5.6, राजस्थान में 6.1 फीसदी आबादी दलित समुदाय की है।

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