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चुनाव आयोग ने दो जगह से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को लेकर दिखाई सख्ती

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(Image credits: The Hans India)

लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग पर कई आरोप लगते रहे। विपक्षी पार्टिया अक्सर evm के मुद्दे पर आयोग पर सवाल खड़े करती आई है। विपक्षी दलों द्वारा आयोग पर सवाल उठाना स्वभाविक है। क्यूंकि यह देखा गया की चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग अधिकतर समय मौजूदा सरकार के नेताओं के खिलाफ आचार संहिता मामले में सख्त कार्रवाई करने से बचता रहा।

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आयोग पर लग रहे आरोपों के बीच हाल ही में चुनाव आयोग ने एक फैसला लिया है। आयोग ने दो जगह से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को लेकर सख्ती दिखाने की कोशिश की है। आयोग ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है जिसके तहत दो जगहों से चुनाव लड़ने और जीत के बाद एक सीट छोड़ने वाले उम्मीदवार से चुनाव में खर्च हुई सारी रकम वसूलने का प्रस्ताव है। इस संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने खत लिखकर केंद्र सरकार के सामने इस बारे में प्रस्ताव रखा है।

बता दें की मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार से जनप्रतिनिधि अधिनियम में संशोधन कर चुनाव लड़ने की सीटों की संख्या को सीमित करने की मांग की है। इसके साथ ही आयोग ने सुझाव दिया है कि मतदान से 48 घंटे पहले तक प्रिंट मीडिया के लिए मौन काल लागू किया जाए। साथ ही टैक्स में छूट के प्रावधानों को सिर्फ चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों तक ही सीमित रखने की सिफारिश की गई है।

आयोग की सिफारिश के मुताबिक पेड न्यूज प्रकाशित या प्रसारित करने और झूठे शपथ पत्र दाखिल करने वालों को दो साल की कैद की सजा दिलाने का प्रस्ताव है। चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, “निष्पक्ष ‘चुनाव कराने के लिए एक स्तर का खेल मैदान जरूरी है। यह केवल चुनावों में धन के प्रभाव को कम करके प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए, चुनाव के संबंध में ”पेड न्यूज” का प्रकाशन और एबेटिंग को भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में जोड़ा जाना चाहिए।”

सीईसी ने एक कैलेंडर वर्ष में मतदाता नामांकन के लिए चार कट-ऑफ डेट्स का प्रस्ताव किया है। 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को नए मतदाताओं के नामांकन का प्रस्ताव किया गया है। फिलहाल 1 जनवरी को 18 वर्ष पूरे करने वाले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करा सकते हैं। आयोग ने लिखा है कि 2 जनवरी को 18 वर्ष का होने वाला युवा अपने नामांकन के लिए अगले वर्ष तक प्रतीक्षा करेगा और क्यूंकि युवा उस वर्ष चुनाव के लिए मतदान करने से चूक सकता है। इसलिए इसके लिए चार कट ऑफ डेट तय किए जाएं।


अब देखना यह है की दो जगह से चुनाव लड़ने के संदर्भ में आयोग द्वारा लिया गया फैसला किस स्तर तक लागु होता है। साथ ही क्या चुनाव आयोग इस सन्दर्भ में पूरी तरह निष्पक्ष होकर निर्णय लेने में समर्थ हो पाएगा। खैर जो भी हो, चुनाव आयोग को इसके साथ साथ बैलट पेपर से चुनाव कराने के बारे में भी मह्त्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है।

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