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शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव को लेकर बेहद कड़ा नियम, जानिए क्या है ख़ास

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(image credits:The Item)

शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव की खबरें हमारे सामने आती रहती है जहाँ ओछी मानसिकता रखने वाले दलित समुदाय के लोगो के साथ शिक्षा के मंदिर में भी जाति के आधार पर भेदभाव करते है। हालाँकि जातिगत भेदभाव को लेकर कई नियम भी बने हुए है पर उनका कुछ खासा असर संस्थानों में देखने को नहीं मिलता। हाल ही में अब शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को कम करने के लिए एक और नियम को लागू किया जा रहा है।

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उच्च शिक्षण संस्थान अब जातीय भेदभाव की घटनाओं पर चुप्पी साध कर नहीं बैठ सकेंगे। संस्थानों को ऐसी घटनाओं के रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। यूजीसी ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों से ऐसी घटनाओं पर नजर रखने के लिए एक मजबूत तंत्र खड़ा करने को कहा है। साथ ही तीस दिन के भीतर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। इनमें पिछले साल जातीय भेदभाव को लेकर दर्ज हुई शिकायतों का ब्यौरा भी शामिल है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के इन कदमों को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले सालों में रोहित बेमुला जैसी घटनाओं ने जिस तरीके तूल पकड़ा था, उसे देखते हुए खास एहतियात बरती जा रही है। यूजीसी के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन ने उच्च शिक्षण संस्थानों को जारी अपने निर्देश में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संस्थानों को अनिवार्य रुप से कमेटी गठित करने को कहा है।

साथ ही इसकी जानकारी यूजीसी से भी साझा करने को कहा है। यूजीसी ने इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों से एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की भी व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए है। इसके तहत संस्थान की वेबसाइट पर भी शिकायत के लिए एक पेज तैयार करने को कहा है।

पहले शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को लेकर नियम तोह बहुत थे पर शिकायत करने पर भी कोई करवाई की सुध लेने वाला नहीं था। अब इस नए नियम के अनुसार शिकायतकर्ता अपने शिकायत को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकता है और साथ ही ऑनलाइन शिकायत भी कर सकता है। नए नियम के अनुसार अब शिकायत दर्ज होने के तीस दिनों के भीतर भी जाँच कमेटी को अपने रिपोर्ट पेश करनी होगी।


यूजीसी ने इस दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों ने पिछले सालों में जातीय भेदभाव को दर्ज की गई शिकायतों का ब्यौरा देने को भी कहा है। साथ ही इनमें से कितनी शिकायतों का निराकरण हुआ और क्या फैसला लिया गया, इसका भी पूरा ब्यौरा मांगा है। यूजीसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक प्रवेश के दौरान ऐसी घटनाओं के होने की ज्यादा उम्मीद होती है, ऐसे में संस्थानों को इस ओर ज्यादा गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

यूजीसी ने जातीय भेदभाव रोकने को लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों को दिए अपने निर्देश में फैकेल्टी पर भी नजर रखने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों को जांचने के लिए फैकेल्टी सदस्यों की एक टीम भी तैनात करने को कहा है, जो संस्थान की गतिविधियों और ऐसी घटनाओं पर नजर रखेगी। साथ ही शिकायत मिलने पर फैकेल्टी के खिलाफ जांच कर अपनी रिपोर्ट भी देगी।

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