fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

पूर्व RBI गवर्नर डी. सुब्बाराव ने बीजेपी सरकार पर लगाए आरोप, कहा- रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट में सरकार का दखल अच्छी बात नहीं

Former-RBI-Governor-D.-Subbarao -accuses-BJP-government,-said - interfering-with-the-government-in-the-balance-sheet-of-the- Reserve-Bank-is-not-a-good-thing
(image credits: Livemint)

अभी हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया RBI के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्तीफा दिया था। यह अक्सर देखा जा रहा है की 2014 के बाद जब से केंद्र में बीजेपी सरकार आई है तब से RBI और केंद्र सरकार के बीच मतभेद देखा जा रहा है। मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हलातों को लेकर अक्सर विपक्षी पार्टियों और अर्थशास्त्रियों द्वारा आरोप लगाया जाते रहे हैं। 

Advertisement

इसी बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व गवर्नर ने शुक्रवार को कहा कि रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट में सरकार का दखल अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के अधिशेष भंडार (Surplus) को हड़पने की कोशिशों से सरकार की हताशा का पता चलता है।

पूर्व गवर्नर ने चेतावनी देते हुए कहा की आरबीआई के अधिशेष भंडार का मूल्य तय करते हुए सजग रहने की जरूरत है। इसके साथ ही सुब्बाराव ने विदेशी बाजारों में सरकारी बॉन्ड जारी करके धन जुटाने के मामले में बताया की यदि ‘बाजार की गहराई मापने के लिए सरकारी बॉन्ड जारी किया जाता है तो उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन विदेशी मुद्रा बाजार से नियमित रूप से धन जुटाने को लेकर सावधान रहने की जरूरत है।

 उन्होंने यह बयान सीएफए सोसायटी इंडिया के एक कार्यक्रम में सम्बोधन के दौरान दिया। सुब्बाराव ने कहा कि यदि दुनिया में कहीं भी एक सरकार वहां कि केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को हड़पना चाहती है तो यह ठीक बात नहीं है। इससे पता चलता है कि सरकार इस खजाने को लेकर काफी व्यग्र है।’

सुब्बाराव ने केंद्रीय बैंक के सरप्लस में हिस्सा लेने के सरकार के प्रयासों पर कहा, रिजर्व बैंक के जोखिम अन्य केंद्रीय बैंकों से अलग हैं। उसके लिए पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय परंपराओं और नियमों का अनुसरण करना पूरी तरह से फायदेमंद नहीं होगा।


बता दें की पूर्व RBI गवर्नर सुब्बाराव की टिप्पणी इस समय सामने आई है, जब यह कहा जा रहा है कि बिमल जालान समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने के अंतिम चरण में है। समिति रिजर्व बैंक की पर्याप्त पूंजी की पहचान करने तथा अतिरिक्त राशि सरकार को हस्तांतरित करने के तौर तरीके के बारे में रिपोर्ट तैयार कर रही है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे के पीछे अन्य कारणों में से केन्द्रीय बैंक के सरप्लस को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक के बीच के खींचतान को भी मुख्य कारण माना गया है। सुब्बाराव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों के बैलेंस शीट पर गौर करते हैं। संकट के समय में ऋण देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष भी इसी तरीके को अपनाती है।

बीजेपी सरकार पर अक्सर अर्थव्यवस्था और RBI के सम्बंद में लग रहे आरोपों से पता चलता है की मौजूदा सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर सही नीतियां बनाने में असफल शाबित हो रही है। अब देखना यह होगा अगर सरकार का इसी प्रकार का रवैया रहता है तो, वह आने वाले समय अर्थव्यवस्था से संबंधित चुनौतियों को किस प्रकार हल करेगी।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved