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सरकार ने आयुष्मान भारत योजना से घुटने की रिप्लेसमेंट और मोतियांबिंद जैसे सर्जरी को हटाने का लिया फैसला

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(image credits: newsmeto)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांशी योजना आयुष्मान भारत में एक बड़ा बदलाव करने की बात सामने आ रही है। इस बदलाव के कारण योजना के तहत लाभ उठाने वाले लोगो को निराशा झेलनी पड़ सकती है। केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना से घुटने की रिप्लेसमेंट और मोतियांबिंद जैसे सर्जरी को हटाने का फैसला लिया है। 

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आपको बता दे की यह दोनों ही सर्जरी आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय रही है। अब ऐसे हालात में इन दोनों को इस योजना से बाहर कर देना उचित नहीं है। हलांकि इसे हटाने के पीछे सरकार ने कुछ अपने ही तर्क दिए है। इकोनॉमिक्स टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, इस श्रेणी के तहत धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच करने में असमर्थ होने के कारन यह फैसला लिया गया हैं।  इसकी जांच करना असंभव है, क्योंकि सरकार आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत एक ही व्यक्ति की सर्जरी का वित्तपोषण कर रही है। 

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार गरीबों में सबसे गरीब लोगों के लिए इस योजना के लिए कई अन्य उठाने वाली है। इसके लिए आयुष्मान भारत के तहत 1300 मेडिकल पैकेजों की लागत समीक्षा के लिए नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर विनोद पॉल की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था।

वहीं इस सीमिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार के द्वारा लाभार्थियों के इलाज के लिए दिए जाने वाले रिबंर्समेंट (प्रतिपूर्ति) के तहत आने वाले मेडिकल पैकेजों को संशोधित करना था। डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने इसकी मांग सितंबर 2018 में इस योजना के शुरूआत में ही कर दी थी। समिति ने 200 पैकेजों की दरों में वृद्धि करने और आयुष्मान भारत के तहत 63 पैकेजों की लागत को कम करने का निर्णय लिया है। 

इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है, जिसमें वह कहता है, “पैकेज में कई गड़बड़िया देखने को मिलीं जैसे कि लेफ्ट ब्रेस्ट सर्जरी और राइट ब्रेस्ट सर्जरी की राशि में 2,000 रुपये का अंतर था। सामान्य सर्जरी पैकेज के तहत की गई सर्जरी की तुलना में कार्डियो-थोरैसिक पैकेज अधिक महंगी थी। इन विसंगतियों को दूर कर दिया गया है।


बता दे की आयुष्मान भारत योजना थोड़ा विवादों में भी रहा है। कुछ ही महीनो पहले इस योजना के तहत गलत दवाई उपलब्ध कराने के मामला देखा गया था। मौजूदा सरकार द्वारा घुटने की रिप्लेसमेंट और मोतियांबिंद जैसे सर्जरी को हटाने का फैसला लेना उचित नहीं लगता है। वो भी तब जब यह दोनों ही लाभार्थियों के बीच अधिक लोकप्रिय रही है। सरकार के इस फैसले से काफी लोगो को नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

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