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राफेल दस्तावेजों को लेकर सरकार खुद ही संदेह में, अब चोरी की बात से किया इंकार

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(Image Credits: NDTV)

कुछ ही महीनो पहले राफेल मुद्दें को लेकर विपक्षी पार्टियों द्वारा मौजूदा सरकार से बहुत से सवालो के जवाब मांगे जा रहे थे। परन्तु सरकार ज्यादातर समय इन सभी सवालो से बचती रही। धीरे धीरे विपक्षी पार्टिया भी सरकार के इस रवैये के कारण इस मुद्दे से पीछे हटती चली गई। लेकिन पिछले बुधवार को ही अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने राफेल के दस्तावेजों से सम्बंधित बड़ा बयान देकर फिर से इस मुद्दे को हवा दे दिया है।

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दरअसल 2 दिन पहले ही राफेल सौदे की पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सरकार ने कहा था की राफेल के कुछ सीक्रेट दस्तावेज चोरी हो गए है। परन्तु अब तीन दिनों के अंदर ही सरकार ने यूटर्न ले लिया और कहा, कोई दस्तावेज चोरी नहीं हुए है। सरकार का कहना है कि राफेल की सीक्रेट फाइल चोरी नहीं हुई, बल्कि फोटोकॉपी हुए हैं।

यहां आपको यह बता दे की, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने ही बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राफेल के दस्तावेज चोरी होने के बारे में बताया था। लेकिन शुक्रवार (08 मार्च) को उन्होंने दावा किया कि राफेल दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से नहीं चुराए गये है और उच्चतम न्यायालय में उनकी बात का मतलब यह था कि याचिकाकर्ताओं ने आवेदन में उन ‘‘मूल कागजात की फोटोकॉपियों’’ का इस्तेमाल किया जिसे सरकार ने गोपनीय माना है।

बुधवार को अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज चोरी होने वाला बयान देकर राजनीति में हलचल पैदा कर दिया था। जिसके बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इतने संवेदनशील कागजात के चोरी होने पर सरकार पर निशाना साधा और जांच की मांग की थी।

अमित शाह ने शुक्रवार को इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल गाँधी और झूठ एक दूसरे के पर्याय है। ट्वीट करके बीजेपी अध्यक्ष ने बताया, ‘‘आज यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब हुये ही नहीं थे. कल उन्होंने कहा था कि रक्षा मंत्रालय से राफेल के दस्तावेज गायब हो गये हैं पर आज ही यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब हुये ही नहीं थे. राहुल गांधी का एक और झूठ जनता के सामने है.’’


उन्होंने आगे कहा ‘कभी राहुल गाँधी अमेठी में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के शिलान्यास को लेकर झूठ बोलते हैं तो कभी कर्जामाफ़ी को लेकर झूठ बोलते हैं, कभी डोकलाम के समय चीनी राजदूत से मिलने को लेकर झूठ बोलते हैं तो कभी फलों और सब्जियों के दाम को लेकर झूठ बोलते हैं। शाह ने कहा, ‘ राहुल गांधी आदतन झूठ बोलते हैं जिससे आज भारतीय राजनीति में उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं रही है।

अमित शाह यहां ही नहीं रुके ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया की, राहुल गाँधी केवल राफेल मामले में ही एक दर्जन से अधिक झूठ बोल चुके हैं. राफेल के दाम और फ्रांस के प्रधानमंत्री तथा मनोहर पर्रिकर से मुलाकात सब पर झूठ बोला, और तो और, लोकतंत्र के मंदिर संसद में भी झूठ बोला.’’

यह माना जा रहा है कि, सियासी हंगामा होने के बाद वेणुगोपाल ने परोक्ष रूप से स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए एक बयान दिया है। जिसमे उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि विपक्ष ने आरोप लगाया है कि (उच्चतम न्यायालय में) दलील दी गई कि फाइलें रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गईं। यह पूरी तरह से गलत है। यह बयान कि फाइलें चोरी हो गई हैं, पूरी तरह से गलत है।’’ आधिकारिक सूत्रों का मानना है की अटॉर्नी जनरल द्वारा “चोरी” शब्द का इस्तेमाल करना बहुत ही सख्त है, जिससे बचा जा सकता था।

सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हुये हैं. साथ ही, उसने ‘द हिन्दू’ समाचार पत्र को इन दस्तावेजों के आधार पर आलेख प्रकाशित करने को लेकर सरकारी गोपनीयता कानून के तहत कार्रवाई की भी धमकी दी थी।

वहीं, केंद्र के इस रूख के बाद द हिंदू प्रकाशन समूह के चेयरमैन एन. राम ने कहा है कि, राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेज जनहित में प्रकाशित किए गए। और उन्हें मुहैया करने वाले गुप्त सूत्रों के बारे में ‘द हिंदू’ समाचारपत्र से किसी भी व्यक्ति को कोई भी सूचना नहीं मिल सकेगा। पत्रकार एन. राम ने कहा कि दस्तावेज प्रकाशित किए गए, क्योंकि ब्योरा दबा कर या छिपा कर रखा गया था।

वहीं राफेल को लेकर बीजेपी के मंत्री अरुण शौरी और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा तथा वकील प्रशांत भूँषण ने संयुक्त रूप से याचिकाएं दायर की थी। उन्होंने पुनर्विचार याचिका में सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज करने का फैसला सुनाने वाले शीर्ष न्यायालय से महत्वपूर्ण तथ्य छुपाये है।

सरकार द्वारा राफेल के दस्तावेजों को लेकर इस तरह का बर्ताव करना उचित नहीं है। कभी सरकार दस्तावेजों के चोरी होने की बात करती है तो, कभी अर्टानी जनरल अपने ही बयान से मुहफेर लेते है। अटार्नी जनरल ने मूल दस्तावेजों की बजाय उनकी फोटोकॉपी चोरी होने के बारे में जानकारी दी। अब हमे यह समझ नहीं आता है की, आखिर सरकार कैसे इतने महत्वपूर्ण दस्तावेजों से सम्बंधित कोई भी जानकारी चोरी होने का दावा कर सकती है।

एक तरफ सरकार राफेल सौदे से जुड़े किसी भी तरह की जानकारी सामने नहीं आने देना चाहती है। और इसके साथ इससे सम्बंधित किसी भी याचिकाओं में महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने आने से रोक देती है। इन सभी घटनाओ से यह पता चलता है की सरकार इस मामले में देश की जनता से कुछ बड़ा छिपाने की कोशिश कर रही है।

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