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मॉब लिंचिंग के बढ़ते आकड़ो को सरकार ने मानने से किया इंकार, दिया यह बयान

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(image credits: Observer Research Foundation)

लगता है केंद्र सरकार देश में हो रहे मोब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर गंभीर नहीं होना चाहती। दरअसल इन घटनाओ से निपटने के लिए कानून बनाने के मामले में केंद्र ने अजीब सा ब्यान दिया है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राज्यों की कानून व्यवस्था का मसला है। इतना ही नहीं केंद्र ने मोब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का डाटा को भी गलत बता दिया है।

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कमाल की बात है की यह अक्सर देखा गया है की मौजूदा सरकार अपनी कमियों को कभी सामने आने ही नहीं देना चाहती। और अगर इन्हे शाबित करने के लिए कोई तथ्य पेश किये जाते है तो सरकार उन्हें सीधा सीधा इंकार कर देती है। कुछ इसी तरह के रवैये के कारन बीजेपी सरकार ने कुछ महीनो पहले रोजगार से संबंधित आकड़ो को सामने आने से रोकने की कोशिश की थी। हालांकि बाद में दबाव आने के बाद उन आकड़ो को सबके सामने लाना पड़ा।

राज्यसभा में बुधवार (17 जुलाई 2019) को एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ‘संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य कानून और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। राज्य सरकारें अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अपराधियों पर मामला चलाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से अपराधियों पर मुकदमा चलाती है।’

जब उनसे पुछा गया की इन घटनाओ में बढ़ोतरी क्यों हो रही है तो उन्होंने कहा, ‘एनसीआरबी का डाटा सही नहीं है। ये संस्था देश में होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं का अलग से कोई आंकड़ा नहीं रखता।’ बता दे की लगभग एक या दो महीने पहले झारखंड में तबरेज के साथ इसी प्रकार के मामला सामने आया था। जिसको लेकर देश के कई राज्यों में लोगो ने विरोध जताया था, और साथ में इसके लिए सख्त कानून बनाने की मांग की थी।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश लॉ कमीशन ने मॉब लींचिंग पर रोकथाम के लिए कानून बनाने की सिफारिश की है। योगी सरकार इस कानून पर आगे बढ़ती है तो ऐसी घटनाओं में शामिल होने वाले को उम्र कैद और पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा।


आकड़े बताते है की बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस प्रकार की घटनाओ में बढ़ोतरी देखी गई है। परन्तु सरकार की तरफ से दावे किए गए हैं कि मोदी सरकारे के आने से पहले भी इस तरह की घटनाएं होती थी। यह बात खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुक हैं। उन्होंने कहा था कि 2014 के बाद से ही मॉब लिंचिंग शुरू नहीं हुई और इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

देखा जाये तो आज के समय में भीड़ तंत्र पर काबू होना मुश्किल होता जा रहा है ,वहीं सरकार भी सख्त कदम उठाने में परहेज करती दिख रही है। जिससे इस प्रकार के कामो को अंजाम देने वालो के हौसले और भी मजबूत होते जा रहे हैं, जो की उचित नहीं है।

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