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बीजेपी विधायक की बेटी की शादी में नया मोड़ , मंदिर के महंत ने शादी के प्रमाण-पत्र को बताया फ़र्ज़ी

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आजकल मीडिया में एक विवाहित जोड़ा सुर्खियों में बना हुआ है। ब्राह्मण भाजपा विधायक की बेटी साक्षी जिसने एक दलित युवक अजितेश के साथ लव मैरिज करी। दोनों ने शादी प्रयागराज के एक मंदिर में की। जिसके बाद दोनों ने विवाह का प्रमाण पत्र सार्वजिक भी किया, जिसमे साफ़ तौर पर दोनों विवाहित जोड़ो का नाम, शादी की तारीख विवाह स्थल और समय के साथ साथ सभी जानकारियां लिखी हुई थी।

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हाल ही में इस पुरे मामले में एक नया मोड़ सामने आ गया है। आपको बता दे की उत्तर प्रदेश के बरेली बिथरी चौनपुर से भाजपा विधायक राजेश मिश्र उर्फ पप्पू भरतौल की बेटी साक्षी और दलित युवक अजितेश कुमार ने जिस मंदिर में शादी की थी वहां के महंत ने बड़ा खुलासा किया है।

जिस मंदिर में दोनों की शादी हुई है, वहां के महंत परशुराम सिंह ने प्रमाण-पत्र को फर्जी बताया हैै। अति प्राचीन राम जानकी मंदिर के महंत परशुराम सिंह ने इस विवाह की जानकारी से ही इनकार करते हुए शादी के प्रमाण-पत्र को ही फर्जी करार दिया हैै। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी मदद लेंगे।  मंदिर के महंत परशुराम सिंह ने बताया कि उनके मंदिर में न शादी होती है और न ही ऐसा कोई प्रमाण-पत्र जारी होता हैै। शादी के प्रमाण पत्र पर आचार्य विश्वपति शुक्ल का नाम लिखा हुआ है जिसके बारे में भी वह के महंत पुजारी ने कहा की उन्हें आचार्य विश्वपति जी शुक्ल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर का नाम बदनाम किया जा रहा है, और इस बारे में वह कानूनी मदद लेंगेै।  

आपको बता दें अनुसूचित जाति के युवक से शादी करने के बाद बरेली के भाजपा विधायक की बेटी साक्षी और उसके पति ने उच्च न्यायालय की शरण ली हैै।  अदालत में साक्षी ने अपनी व अपने पति की सुरक्षा की मांग भी करी है।  इन दोनों की तरफ से उच्च न्यायालय में अपने विवाह का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रयागराज के बेगम सरयू स्थित अति प्राचीन राम जानकी मंदिर में विवाह होने और वहीं से प्रमाण-पत्र प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।  इस प्रमाण-पत्र पर साहित्याचार्य कर्मकांड विशेषज्ञ आचार्य विश्वपति जी शुक्ल का नाम दर्ज है। मंदिर के पुजारियों ने ना जाने किसके दबाव में आकर इस प्रमाण पत्र को ही फर्जी साबित कर दिया है। हालाँकि इस प्रमाण पत्र के आधार पर ही उच्च न्यायालय ने दोनों को सुरक्षा और शरण देने की अर्जी को स्वीकार किया था। 

मंदिर प्रशसन ने यह मानने से साफ़ इंकार कर दिया है की शादी उनके मंदिर में हुई है उन्होंने यह तक कहा है की हमारे मंदिर में शादी होती ही नहीं है यह प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाया गया है हालाँकि इस पुरे मामले में कोई सच्चाई का आधार दिखाई नहीं पड़ रहा है क्या मंदिर के पुजारी किसी के दबाव में आकर इस तरह का बयान दे रहे है इस पुरे मामले की सच्चाई क्या है जिसका जल्द की खुलासा हो जायेगा। 


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