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चुनाव से पहले नाकामी छुपाने के लिए एक और रिपोर्ट दबाने में लगी है मोदी सरकार

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(Image Credits: India Today)

लोकसभा चुनाव जैसे जैसे पास आ रहे हैं वैसे वैसे बीजेपी सरकार पर सवालो की बौछार होती जा रही है। बीजेपी ने यूँ तो कई ऐसे कीमती दस्तावेजों को बाहर आने से रोका है जिससे उसको खतरा है। चाहे वह अपने कार्यकाल में किये गए कामो की दस्तावेज हो या फिर राफेल से जुड़े। यहाँ तक की हालही में केंद्र सरकार की नाकामी को बताने के लिए रोजगार से जुडी एक रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गयी थी जिसे मोदी सरकार ने बाहर आने से रोका था।

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मोदी सरकार यूँ तो दूसरी पार्टियों पर हल्ला बोलने पर नहीं चुकती। पार्टियों पर देशद्रोह, बेरोजगारी और अत्याचार जैसे गंभीर आरोप लगाने वाली मोदी सरकार खुद की नाकामी को छुपाने में लगी है। लोगो से बड़े बड़े वादे करने वाली मोदी सरकार किस प्रकार आपने कामो में नाकाम रही है यह तो सभी जानते है। लोगो को रोजगार देने से लेकर किसानो और मजदूरों के लिए निकली सभी योजनाए धरी की धरी रह गयी।

ऐसे में चुनावी सा,आय के दौरान बड़ी बड़ी ढींगे हाँक रही ,मोदी सरकार अपनी कोई भी रिपोर्ट बाहर लाने से बच रही है। कुछ रिपोर्ट्स सरकार के कार्यकाल से जुड़े है। बता दें कि NDA सरकार ने अभी तक NSSO की बेरोजगारी पर जबकि लेबर ब्यूरो की नौकरियों और बेरोजगारी से जुड़ी छठवीं सालाना रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की है।

दोनों ही रिपोर्ट में NDA के शासनकाल में नौकरियों में गिरावट आने की बात कही गयी थी। नौकरियों और बेरोजगारी से जुड़ी लेबर ब्यूरो की छठवीं सालाना रिपोर्ट में बताया गया था कि 2016-17 में बेरोजगारी चार साल के सर्वोच्च स्तर 3.9 पर्सेंट पर थी।

वहीं, NSSO की रिपोर्ट में कहा गया था कि बेरोजगारी 2017-18 में 45 साल के सर्वोच्च स्तर 6.1 पर्सेंट पर थी। नीति आयोग ने पिछले महीने लेबर ब्यूरो से कहा था कि वे सर्वे को पूरा करके अपने निष्कर्ष 27 फरवरी को पेश करें ताकि उन्हें आम चुनाव से पहले सामने लाया जा सके।


द इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले महीने 22 फरवरी को खबर छापी थी कि नैशनल सैंपल सर्वे ऑफिस यानी NSSO की रिपोर्ट को खारिज करने के बाद NDA सरकार ने लेबर ब्यूरो के सर्वे के निष्कर्षों को इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

हालांकि, बीते शुक्रवार को हुई एक मीटिंग में कमेटी ने लेबर ब्यूरो ने रिपोर्ट की ‘कुछ गड़बड़ियों को दुरुस्त’ करने के लिए कहा। गड़बड़ी को ठीक करने के लिए ब्यूरो ने 2 महीने का वक्त मांगा है।

कमिटी की इस स्थित विचार को फिलहाल केंद्रीय श्रम मंत्री ने मंजूरी नहीं दी है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार से चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद यह फैसला हुआ है कि इस रिपोर्ट को चुनाव के दौरान सार्वजनिक न किया जाए।

मोदी सरकार के राज में नौकरियों में कितनी गिरावट आयी है यह बात सामने रखने से मोदी सरकार डर रही है। काले धन से लेकर राफेल तक की रिपोर्ट को दबाया गया। हालही में यह भी खबर आयी की राफेल की रिपोर्ट चोरी हो गयी। चुनाव से पहले ही इस प्रकार की घटना का होना आम बात नहीं। भाजपा सरकार अपने नाकामी को छुपाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है जिससे उसे लोकसभा चुनाव में कोई नुकसान न हो।

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