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मोदी सरकार देश के 6 आईआईएम (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनजमेंट) की फंड पर लगा सकती है रोक, शिक्षाविदों ने दी चेतावनी

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(image credits; The Hindu)

मौजूदा सरकार अपने निर्णय से देश की जनता को पहले भी झटका दिया है। नोटबंदी इसी का उदाहरण, जिसके कारण युवाओ में बेरोजगारी बड़ी थी। बीजेपी सरकार आये दिन कोई न कोई निर्णय लेती दिख रही है, इसी प्रकार मोदी सरकार ने सूचना अधिकार में बदलाव करने का फैसला लिया। यह अक्सर देखा गया है मौजूदा सरकार निर्णय तो ले लेती हैं परन्तु उससे लोगो पर होने वाला प्रभाव को नजरअंदाज कर देती है।

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इसी प्रकार केंद्र की बीजेपी सरकार ने एक और निर्णय लिया है जिसके तहत देश में छह नए आईआईएम (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट) को मिलने वाले फंड पर रोक लग सकती है। सरकार की एक समिति ने इन छह नए आईआईएम के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड पर रोक लगाने की सिफारिश की है।

समिति की इस सिफारिश के बाद वरिष्ठ शिक्षाविदों का कहना है कि फंड पर रोक लगने से इन बिजनेस स्कूलों में मौजूदा सुविधाओं का लाभ उठाना भी मुश्किल हो जाएगा। टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिवाइज्ड कॉस्ट एस्टिमेट कमेटी ने हाल ही में अपनी सिफारिश में कहा कि झारखंड के रांची, हरियाणा के रोहतक, छत्तीसगढ़ के रायपुर, उत्तराखंड के काशीपुर, राजस्थान के उदयपुर और केरल के त्रिची में आईआईएम के फंड रोकने की सिफारिश की है।

दरअसल समिति का कहना है कि इन संस्थानों ने इनको आवंटित की गई राशि से अधिक खर्च कर दिया है। ऐसे में इन्हें अतिरिक्त फंड को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। देखने वाली बात है, जहां चुनाव में प्रचार के नाम पर बीजेपी द्वारा कितनी ही राशि खर्च कर दी जाती है, उसका कोई हिसाब नहीं है, परन्तु शैक्षणिक संस्थानों द्वारा तय सीमा से अतिरिक्त खर्च कर दिया जाए तो फण्ड में कटौती की बात सुनने को मिलता है। जो की उचित नहीं लगता है। 

हालाँकि समिति की इस सिफारिश पर मंत्रालय ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। वहीँ इस संबंध में आईआईएम के दो पूर्व निदेशकों ने नाम नहीं सार्वजानिक करने की शर्त पर बताया कि इन बिजनेस स्कूल में जिस लागत बढ़ने की बात कही जा रही है उसके पीछे कारण है। इनको दिए जाने वाले खर्च का अनुमान, जोकि वर्ष 2008 के बाजार पर आधारित था। 


उन्होंने आगे कहा की यदि फण्ड में कटौती की गई तो, ये स्कूल साल 2020-21 तक प्रति वर्ष एमबीए में 560 छात्रों के एडमिशन के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे। इन्होने विशेष रूप से कहा कि बिजनेस स्कूलों में इमारतों और क्लासरूम इंफ्रास्ट्रक्चर का काम लगभग पूरा हो गया है। सिर्फ हॉस्टल की बिल्डिंगों का काम चल रहा है।

उन्होंने कहा फण्ड में रोक लगाने के कारण बिल्डिंगों का काम रुक जाएगा। साथ ही ये अपने यहां छात्रों की संख्या बढ़ाने और एकेडमिक सुविधाओं का उपयोग करने में असमर्थ हो जाएंगे। बता दे की इन आईआईएम को साल 2009-10 और 2010-2011 में शुरू किया गया था।

यदि केंद्र की मोदी सरकार फण्ड रोकने की इस सिफारिश को मंज़ूरी दे देती है तो काफी छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक तरफ मौजूदा सरकार देश में युवाओ के विकास, रोजगार और शिक्षा की बातें करती है, परन्तु वही सरकार में कुछ लोगो द्वारा शिक्षण संस्थानों को दिए जाने वाले राशि में  रोक लगाने की सिफारिश कर दी जाती है जो की हैरान करने वाले लगता है। देखा जाये तो कहीं न कहीं इस सिफारिश के पीछे मोदी सरकार का ही हाथ है।

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