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मोदी सरकार ने कालेधन से जुड़े जानकारी को सार्वजानिक करने से किया इंकार

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(Image Credits: DNA India)
विदेशो में छुपे काले धन को लाने के लिए मोदी सरकार ने बहुत बड़ी बड़ी डींगे हाँकि थी, यहाँ तक कहा था की अगर विदेशो में रखे काले धन को ले आया गया तोह, देश के हर व्यक्ति को 15 से 20 लाख रूपए तो यु ही मिल जायेंगे। PM मोदी का यह बयान आज तक सुर्खियों में रहता है। की किस तरह से मोदी ने देश की जनता को गुमराह किया।
वही अब काले धन को लेकर मोदी सरकार का एक नया जुमला सामने आया है।  वित्त मंत्रालय ने कालेधन पर उन तीन रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से मना कर दिया है, जिनमें देश के भीतर और विदेश में भारतीयों द्वारा कालाधन रखने से जुड़ी जानकारी है। मंत्रालय का कहना है कि इन रिपोर्ट की जांच एक संसदीय समिति कर रही है, ऐसे में इन्हें सार्वजनिक करने से संसद के विशेषाधिकार का हनन होगा।
अब हम उन तीन रिपोर्ट के बारे में बात करते है जिस मोदी सरकार ने लोगो के सामने लाने से साफ़ मना कर दिया है। दरसल 2011 में UPA सरकार ने दिल्ली में स्थित  सरकार की 3 बड़ी संस्थाओ को ब्लैक मनी से जुडी सभी प्रकार की जानकारियों को जुटा कर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था।
यह तीन एजेन्सिया कौन कौन सी है पहले हम उसको बताते है, जिससे काले धन पर रिपोर्ट त्तैयार करने के लिए कहा गया था , इसमें सबसे पहली National Institute of Public Finance and Policy, दूसरी National Council of Applied Economic Research, और तीसरी एजेंसी है National Institute of Financial Management इन तीन संस्थाओ को पिछली कांग्रेस  सरकार ने ब्लैक मनी को लेकर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था।
इन तीन एजेंसियो ने एक रिपोर्ट तैयार कर करीब 4 पहले ही मोदी सरकार को  सौंपा दिया था, वही हाल ही में न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की तरफ से एक RTI दायर की गई और उसमे इस रिपोर्ट के बारे में सरकार से पूछा गया, सरकार ने RTI का जवाब देते हुए कहा की हमे National Institute of Public Finance and Policy की तरफ से रिपोर्ट 30 दिसंबर 2013 मिली , वही दूसरी एजेंसी National Council of Applied Economic Research की तरफ से रिपोर्ट 18 जुलाई 2014 को मिली,  और तीसरी एजेंसी National Institute of Financial Management की तरफ से रिपोर्ट 21 अगस्त 2014 को मिली थी। यह जवाब सरकार ने RTI में दिया है। यानी 2014 तक यह रिपोर्ट मौजूदा सरकार को सौंप दी गई थी.
वही सरकार ने यह भी कहा है की रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, रिपोर्ट और सरकार की प्रतिक्रिया को लोकसभा सचिवालय को भेज दिया गया ताकि उसे वित्तीय मामलों स्थायी समिति के सामने पेश किया जा सके।
और मंत्रालय ने फिलहाल इन रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से मना कर दिया. इसके पीछे तर्क दिया गया है कि इससे संसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन होगा.
और वही सरकार बहार बार यह तर्क दे रही है की उनके पास ब्लैक मनी से जुड़े सटीक आंकड़े मौजूद नहीं है जिसे सार्वजनिक किया जा सके।

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