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मोदी का रोड शो पड़ा फीका, 100 से ज्यादा रिटायर्ड फौजियों ने मोदी पर लगाए गंभीर आरोप

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(Image Credits: Inkhabar)

देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अपने संसदीय क्षेत्र में रोड शो किया जिसमे करीब 7 लाख लोग शामिल हुए थे। मोदी ने 7 किलोमीटर तक रैली निकाली। मोदी के इस रोड शो के पीछे का मकसद सिर्फ लोगो को लुभाना और अपनी ताकत दिखाना था। लोगो से किये झूठे वादे और और अपनी नाकामी को छुपाने के लिए या रोड शो किया गया।

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इस रोड शो में सिर्फ मोदी पर ही नजर थी परन्तु अब उस रोड शो के बाद मोदी के संसदीय क्षेत्र में कुछ रिटायर्ड या बर्खास्त सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों ने डेरा डाल दिया है। उन्होंने मोदी के खिलाफ मोर्चा निकाला है और मोदी के खिलाफ चुनाव प्रचार करने का मन बनाया है। 100 से अधिक जवानो ने इस मुहीम में शिरकत की है। फौजियों ने मोदी पर काफी गंभीर आरोप लगाए है जो देश की सेना से जुड़े है। इन फौजियों का कहना है कि पीएम मोदी सेना को कमजोर कर रहे हैं और सेना में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। ये जवान वाराणसी के मडु़आ डीह क्षेत्र में रुके हैं।

खराब खाने की शिकायत करने के बाद बर्खास्त किए गए बीएसएफ जवान तेज बहादुर के समर्थन में यह सभी लोग प्रचार करेंगे। तेज बहादुर फौजी ने वाराणसी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार यह संभव हो सकता है की यह लोग पीएम मोदी के नामांकन के दौरान उन्हें काले झंडे भी दिखाएं। तेज बहादुर का कहना है कि मैं सच्चा चौकीदार हूं और फर्जी चौकीदार के खिलाफ लड़ रहा हूं।

दरअसल तेज बहादुर का प्रचार भी ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री मोदी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने सेना के गौरव को बहाल किया है। वे अपने शासनकाल में पाकिस्तान में घुसकर हमला करने की बात कहते हुए वोट मांगते फिर रहे हैं। इस बात को लेकर पूर्व सैन्य प्रमुख समेत कई रिटायर्ड सैनिक राष्ट्रपति से शिकायत कर चुके हैं। मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देने समेत दो कारण से पूर्व और सस्पेंड किए गए सैनिक उनके खिलाफ हैं।

सभी फौजी 29 सितंबर 2016 को एलओसी पर आतंकी लॉन्च पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक करने के लिए पीएम पर ‘मिलिट्री सिक्रेट का खुलासा’ करने का दोष मढ़ रहे हैं। इसके अलाव साल 2014 के चुनाव में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के बावजूद वे अभी भी सेना में ‘भ्रष्ट अधिकारियों के साथ खड़े’ हैं।


इन फौजियों ने शिकायत की है कि वे अपने बड़े अधिकारियों और भ्रष्टाचार का विरोध करने की कीमत अदा कर रहे हैं। इसके पीछे सरकार की तरफ से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उनकी शिकायतों को अनदेखा करना है। साल 2001 में सेना से रिटायर्ड हवलदार 62 वर्षीय ओम प्रकाश सिंह का कहना है की, ‘सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक पहली सर्जिकल स्ट्राइक नहीं थी। मैं खुद पहले भी पाकिस्तान के इलाके में की गई कई सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा रहा हूं।’

सीआरपीएफ से सस्पेंड किए गए 32 वर्षीय पंकज मिश्रा भी अपनी बात कहते हुए यह बताते है की, ‘सैनिकों की तरफ से कम से कम 4000 शिकायतें दी गई हैं। इनमें अधिकारियों की तरफ से अपने घरों पर छोटे-छोटे काम करने पर मजबूर किया जाता है। ये सभी शिकायतें पिछले तीन साल से पीएमओ में पेंडिंग पड़ी हैं।’

नरेंद्र मोदी जहाँ सैनिको को अपनी ताकत बताते रहते है वही इन सभी रिटायर्ड सैनको की बात से पता चलता है की वह मोदी सिर्फ राजनीति के लिए इनका इस्तेमाल करते है। वोट मांगने के लिए मोदी ने सैनको की शहादत का इस्तेमाल किया। कुछ ही दिन पहले मोदी ने वोटरों से अपने भाषण में उन सभी शहीद सैनको के नाम पर वोट माँगा था। यह बात साफ़ है इन रिटायर्ड सैनको की मोदी के लिए कोई कीमत नहीं है और ना ही उनकी फ़िकर है।

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