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150 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों ने बीजेपी को सेना के शौर्य का राजनीतिकरण न करने को कहा

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(Image Credits: News18)

मोदी सरकार भारतीय सेना के नाम पर जनता से वोट मांगने की अक्सर कोशिश करती आई है। सेना के नाम के सहारे मौजूदा सरकार अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करती है। सरकार के इन्ही हरकतों के कारण पूर्व नौसेना प्रमुख ने सरकार से नाराजगी जताई थी। इसके साथ साथ उन्होंने बीजेपी को सेना का नाम प्रयोग करके राजनीतिक फायदे उठाने से मना भी किया था। लेकिन इसके बाद भी बीजेपी में कुछ लोग सेना के नाम का गलत प्रयोग कर रहे है। हाल ही की बात है जब उत्तर प्रदेश के मुख़्यमंत्री योगी ने भारतीय सेना को मोदी जी की सेना बता दिया था।

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सरकार के इसी प्रकार के रवैये के कारण भारतीय सेना के लगभग 150 दिगज्जों ने इसी सन्दर्भ भारतीय सेना राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को पत्र लिखा है। तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों सहित 150 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को सेना के राजनीतिकरण के ख़िलाफ़ चिट्ठी लिखी ह। इस पत्र में कहा गया ही की सत्ताधारी दल सर्जिकल स्ट्राइक जैसे सेना के ऑपरेशन का श्रेय ले रही है। इसके साथ ही सेना को मोदी जी की सेना के तौर पर बताया जा रहा है। हालाकिं NDTV के सूत्रों के अनुसार यह बताया जा रहा है की, राष्ट्रपति भवन को सैन्य अधिकारियों के इस प्रकार के पत्र की कोई जानकरी नहीं है।

बता दें की जिन दिग्गजों के नाम पत्र में सामने आए हैं उनमें तीन पूर्व सेना प्रमुख हैं- जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्स, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉय चौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, चार पूर्व नौसेना प्रमुख और पूर्व वायु सेना प्रमुख एनसी सूरी है।

यह पत्र 11 अप्रैल को सार्वजानिक हुआ था। जिसमे राष्ट्रपति को राजनीतिक दलों के सेना के राजनीतिक इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाने की अपील की गई है। बता दें की महाराष्ट्र के लातूर की रैली में पीएम मोदी ने पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से कहा कि ‘वे अपने मत उन बहादुर लोगों को समर्पित करें, जिन्होंने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले को अंजाम दिया’. तभी से पीएम मोदी के इस बयान पर बवाल खड़ा हो गया है।

चुनाव आयोग ने प्रधामंत्री मोदी के इस बयान को संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है, सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग (Election Commission) ने महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयोग से पीएम मोदी (PM Modi) के ऐसे भाषण पर रिपोर्ट मांगने की बात कही है।


इस बारे में महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने चुनाव आयोग को बताया है। कि पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से बालाकोट हवाई हमले के नाम पर अपना वोट डालने की अपील वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी उन आदेशों का उल्लंघन है। जिसमें उसने अपने प्रचार अभियान में राजनीतिक दलों से सशस्त्र बलों के नाम का इस्तेमाल नहीं करने को कहा था।

विपक्षी पार्टी ने भी मोदी के इस बयान पर एतराज जताया है। विपक्षी पार्टी भाकपा ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (Election Commission) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। भाकपा ने नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि मोदी ने महाराष्ट्र में एक रैली में पहली बार मतदान करने वालों से बालाकोट में आतंकी शिविर पर हवाई हमला करने वाले वायुसैनिकों के नाम पर वोट मांगकर चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

चुनाव शुरू हो चुके हैं लेकिन मौजूदा सरकार द्वारा आचार सहिंता का उल्लघन करना रुक नहीं रहा है। कभी उनके मंत्री द्वारा आचार सहिंता का उल्लघन किया जाता है तो कभी खुद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यह किया जाता है। ऐसा लगता है चुनाव आयोग ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए है। चुनाव आयोग द्वारा सिर्फ चेतावनी देना, फिर उसके बाद आयोग द्वारा इस प्रकार कोई कार्रवाई नहीं किया जाना उचित नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय सेना के सौर्य का राजनीतिक इस्तेमाल करना उनके पद को शोभा नहीं देता है। लेकिन मौजूदा सरकार तो वोट पाने के लिए किसी का भी सहारा लेने से पीछे नहीं हटती है। बीजेपी सरकार को किसी भी नियमो और कानूनों की परवाह नहीं है। जिसके कारण ही चुनाव आयोग द्वारा उन्हें चेतावनी देने के बाद भी पार्टी के नेताओ द्वारा इस प्रकार बार बार नियमो का उल्लघन किया जाता है।

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