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600 से अधिक थियटर आर्टिस्ट् और वैज्ञानिको ने बीजेपी को वोट न करने के लिए की अपील

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(Image Credits: The Wire)

लोकसभा चुनाव शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी रह गए है। एक तरफ सभी राजनीतिक पार्टियां लोगो के बीच रैली करने में व्यस्त है। इन सभी के बीच जंहा बीजेपी अपने झूठे कामो को लेकर लोगो का वोट बटोरने में लगी है ,वहीँ दूसरी ओर देश में कुछ लोगो द्वारा बीजेपी को वोट न करने की बात कही जा रही है। मौजूदा सरकार के कामों से देश के लोगो में नाराजगी जाहिर है। वहीँ कुछ लोग तो सरकार से इस कदर नाराज हो गए हैं, की उन्होंने लोगो से आगामी चुनाव में बीजेपी को वोट न करने की अपील ही कर दी है।

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दरअसल देशभर में 600 से अधिक थियटर आर्टिस्ट्स ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी किया। जिसमे उन्होंने देश के नागरिको को भाजपा को वोट नहीं करने के लिए कहा है। लगभग 616 कलाकरों ने सयुंक्त बयान पर हस्ताछर करके अपनी नाराजगी जाहिर की है। हस्ताक्षर करने वालो में अमोल पालेकर, अनुराग कश्यप, डॉली ठाकोर, लिलेट दुबे, नसीरुद्दीन शाह, अभिषेक मजूमदार, अनामिका हक्सर, नवराज जौहर, एमके रैना, महेश दत्तानी, कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह और संजना शामिल हैं।

इस अपील में साफ तौर पर कहा गया है कि आगामी चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों को वोट ना दें। साथ साथ अपील में यह कहा गया है कि सामाजिक तानेबाने को खत्म करने वाली घृणा का अंत करने के लिए वोट करें।

सयुंक्त बयान में लोगों से बीजेपी को वोट करने की बजाय एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समावेशी भारत के लिए वोट करने की अपील की गई। इसमे कहा गया कि सबसे कमजोर को सशक्त बनाने, स्वतंत्रता की रक्षा करने, पर्यावरण की रक्षा करने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए वोट दें। इन सभी लोगो की यह अपील हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बंगाली, मराठी, मलयालम, कन्नड़, असमिया, तेलुगु, पंजाबी, कोंकणी और उर्दू सहित 12 भाषाओं में जारी की गई है।

इस सयुंक्त बयान में कहा गया की, 2019 का लोकसभा चुनाव आजाद भारत के इतिहास में सबसे मुश्किल चुनावों में से एक होगा हैं। 2014 में बीजेपी कई वादों के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन उन्होंने हिंदुत्व के गुंडों को जन्म दिया। मौजूदा सरकार हिंसा और नफरत की सरकार है। जिस पार्टी को देश के लोगो ने पांच साल पहले राष्ट्र के उद्धारकर्ता के रूप में चित्रित किया था, उसी पार्टी ने अपनी नीतियों के माध्यम से लाखों लोगों की आजीविका को नष्ट कर दिया है।


कलाकारों ने कहा कि ‘भारत का विचार’ आज खतरे में है। आज देश में गीत, नृत्य, हंसी और हमारा संविधान ये सभी खतरे में है। सवाल करना, झूठ को सामने लाना और सच बोलने को ‘राष्ट्र-विरोधी’ का नाम दे दिया जाता है। उन्होंने नागरिकों से संविधान की रक्षा करने में मदद करने और भारत को बचाने के लिए बीजेपी को वोट ना करने की अपील की।

बता दे की इससे पहले देश के 100 से ज्यादा फिल्मकारों, 200 से ज्यादा प्रतिष्ठित लेखकों और 150 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने भी अलग-अलग बयान जारी कर देशवासियों से घृणा की राजनीति के खिलाफ वोट देने की अपील की है। देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक भी मतदाताओं से हिंसा और नफरत की राजनीति करने वालों के खिलाफ ‘सोच-समझकर’ वोट करने की अपील कर चुके हैं।

इससे पूर्व भी एक मामला सामने आया था जब लगभग 200 फिल्म निर्माताओं ने मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट करने की अपील करी थी। फिल्मजगत से जुड़े फिल्म निर्माताओं ने बीजेपी सरकार को वोट न करने को लेकर बयान दिया था। देशभर से इतने लोगो का मौजूदा सरकार के खिलाफ होना आम बात नहीं है। इन सभी लोगो ने इस प्रकार का बयान देकर सरकार के कामों के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इससे पता चलता है की देश में कहीं न कहीं लोकतंत्र का माहौल अनुकूल नहीं है।

मौजूदा सरकार के रवैये से देश की जनता इस प्रकार नाराज हो गई है की अब तो लोग अपनी नाराजगी जाहिर भी करने लगे हैं। इन सभी कलाकारों और वैज्ञानिकों द्वारा सरकार पर इस प्रकार के इल्जाम लगाना, उनकी सरकार के प्रति व्यथा को दर्शाता है। मौजूदा सरकार अब चाहे कितने ही अपनी सफलताओं का बखान कर ले, परन्तु उनकी नाकामियां अब सामने आने लगी है। चुनाव करीब है और लोग अपना मन बना चुके हैं।

बीजेपी सरकार लोगो का विश्वास जीतने की अब चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, लेकिन लोग अब उनकी बातो में नहीं आने वाले है। देश की जनता ने उन्हें पांच साल दिया लेकिन सरकार अपने वादों पर खरा उतरने में असफल रही है। इतना ही नहीं मौजूदा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में देश में ऐसा माहौल बना दिया है। जिसमे लोग आपसी भाईचारा भी भूलते नजर आ रहे हैं। इसके साथ साथ मौजूदा सरकार ने अपने फायदे हेतु लोकतंत्र के महत्वपूर्ण संस्थानों को प्रभावित करने की कोशिशे भी की। सरकार द्वारा पिछले 5 सालो में देश में इस प्रकार का माहौल बना दिया गया जिसके कारन आज लोग इन संस्थानों के निर्णय को संदेह की नजर से देखने को मजबूर हो चुके हैं।

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