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वित्त मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री पर लगे बैन को नहीं हटाने के मूड में निर्मला सीतारमन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुछा तो नहीं दिया जवाब

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(image credits: the print)

हाल ही में खबर आई थी की वित मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री पर बैन लगाया गया है। दरअसल जब से निर्मला सीतारमन को वित्त मंत्रालय सँभालने की जिम्मेदारी दी गई है उसी दौरान से उन्होंने मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री पर बंदिशें लगा दीं। जिससे लगभग सभी पत्रकार नाराज चल रहे है। इस बंदिश के कारण मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी एंट्री लेने के लिए अपॉइंटमेंट की जररूत है। कारण सभी पत्रकार इसे हटाने की मांग कर रहे है।

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शुक्रवार को जब पत्रकारों को एक मौका मिला, उस दौरान वे सीतारण को राजी करके इन बंदिशों को खत्म करवा सकते थे। यह मामला तब का है जब वित् मंत्री सीतारमण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कुछ बड़े ऐलान करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करके जा रहीं थी। उसी दौरान पत्रकारो ने उनसे एंट्री पर लगे बंदिश की बात की।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार सीतारमण बंदिशें खत्म करने के लिए राजी नहीं हुईं। उन्होंने वरिष्ठ पीआईबी अधिकारियों से मजाक में पूछा कि क्या अफसर उनका ‘घेराव’ करवाना चाहते हैं? ऐसा करके उन्होंने पत्रकारों को टाल दिया।

आपको बता दे की केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा पत्रकारों की एंट्री पर लगी इन बंदिशों को अभूतपूर्व माना जा रहा है। हालांकि, पत्रकारों पर लिए गए इस फैसले पर बवाल होने के बाद निर्मला सीतरमन के दफ्तर ने इस मामले पर सफाई भी जारी की थी। वहीं बताया जा रहा है कि मंत्रालय के भीतर मीडियाकर्मियों की एंट्री के संबंध में एक प्रक्रिया तय की गई है और पत्रकारों के प्रवेश पर किसी तरह का ‘बैन’नहीं है।

वहीँ आपका यह जानना भी जरुरी है की इस तरह पत्रकारों की एंट्री, अपॉइंटमेंट द्वारा निश्चित करने की व्यवस्था अभी तक सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और जांच एजेंसियों और रेगुलेटरी बॉडीज के दफ्तरों में थी। हालाँकि, वित्त मंत्रालय में भी बजट के वक्त एक निश्चित समयावधि के लिए ही पत्रकारों की एंट्री पर रोक होती थी।


वित्त मंत्रालय द्वारा पत्रकारों के प्रवेश को लेकर इस प्रकार के नियम बनाना उचित नहीं लगता है। आखिर मौजूदा सरकार इस तरह के नियम बनाकर क्या शाबित करना चाहती है। वित्त मंत्रालय के ऐसे रवैये से लगता है की वह गिने चुने पत्रकारों को ही प्रवेश की अनुमति देने का विचार कर रही है। जिससे की मंत्रालय से ज्यादा सवाल जवाब न पुछा जा सके।

केंद्र सरकार धीरे धीरे वह सभी व्यवस्था को कम करने की सोच रही है जिससे की वह उनपर उठने वाले सवालों के जवाब देने से बच सके। सरकार का ऐसा रवैया बिलकुल भी मान्य नहीं लगता है।

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