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संसदीय समिति ने पाक में वायुसेना के कार्रवाई के मांगे सबूत, विदेश मंत्रालय ने दिखाने से किया इंकार

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(Image Credits: Livemint)

हाल ही में भारत द्वारा पडोसी मुल्क के आतंकी कैम्पो पर किए गए हवाई हमले से भारत में राष्ट्रवाद की भावना सी उमड़ पड़ी है। मौजूदा सरकार ने भी इसकी सहायता से पूरे देश के लोगो को अपनी तरफ करने की कोशिश भी की। वहीं कुछ लोगो द्वारा एयर फाॅर्स द्वारा की गई इस करवाई पर सवाल उठाये गए। इसके साथ संसद एक समिति ने वायुसेना की इस कार्रवाई को लेकर भारत के फैसले के पीछे की वजहों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत कराने के लिए एक व्यापक मुहिम चलाने को कहा।

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दरअसल विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने यह सुझाव तब दिया जब विदेश सचिव विजय गोखले ने जम्मू कश्मीर CRPF पर हुए हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच के घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी थी। समिति ने विदेश सचिव से कहा कि सरकार हवाई हमले के असर को प्रमुखता से सामने रखे और यह बताएं कि मारे गए आतंकियों समेत जैश ए मोहम्मद को कितना नुकसान हुआ। समिति के एक सदस्य ने बताया कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी इस हमले के असर पर सवाल नहीं खड़ा कर पाए ।

संसदीय समिति द्वारा वायुसेना की कार्रवाई को लेकर सबूत मांगना जायज है। आखिर लोगो को भी पता चला की इस कार्रवाई में कितने आतंकी को नुकसान पंहुचा है। रक्षा मंत्रालय को बिना कोई देरी के इससे सम्बंधित सारे सबूत संसदीय समिति के सामने उजागर कर देने चाहिए जिससे की सच सामने आ सके।

सूत्रों से पता चला है की गोखले ने समिति के सदस्यों को पाकिस्तान में जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी शिविर पर हवाई हमले और बाद में पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बारे में बताया। बैठक में विदेश मंत्रालय के अधिकारी गोखले का सहयोग कर रहे थे। गोखले ने हवाई हमले से हुए नुकसान के बारे में पूछे गये कुछ सवालों का जवाब दिया। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय ही इसका जवाब देने के बेहतर स्थिति में है।

समिति के सदस्य के अनुसार शुक्रवार को दी गई जानकारी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अबतक के कार्यकाल का विदेश मंत्रालय द्वारा किया गया आकलन शामिल था। विदेश सचिव ने समिति को बताया कि पाकिस्तानी वायुसेना की भारत में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश विफल रही क्योंकि वायुसेना ने उसे नाकाम कर दिया लेकिन इसी क्रम में वह (पाकिस्तान) अपना एक लड़ाकू विमान गंवा बैठा। समिति के एक सदस्य ने बाद में बताया कि सदस्यों ने विदेश सचिव से कहा कि सरकार आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाने के अपने कदम के पीछे की वजहों को खुले तौर पर दुनिया के सामने रखे।


साथ यह भी बताया कि विदेश सचिव ने जम्मू कश्मीर में CRPF काफिले के साथ हुए घटना से लेकर हवाई हमले तक मंत्रालय द्वारा उठाये गये कूटनीतिक कदमों का ब्योरा पेश किया है। विदेश सचिव ने समिति को आश्वासन दिया कि विश्व बिरादरी के समय इस संबंध में अभी मुहिम चल ही रही है। इसके साथ साथ उन्होंने बताया की किस प्रकार बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तहत भारत ने पहली बार शुक्रवार को अबूधाबी में ओआईसी की बैठक को संबोधित किया जहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विशिष्ट अतिथि हैं।

इसके साथ यह भी कहा जा रह है की समिति ने पाकिस्तान पर आतंकवाद निरोधक हमले के बारे में विदेश सचिव से कई सवाल किये, लेकिन उन्होंने जवाब देने में सावधानी बरती और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए खुलासा करने से इंकार कर दिया।

बता दें की इस बैठक में संसदीय समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता शशि थरूर, अरका केशरी देव, प्रोफेसर रिचार्ड हे, जगदम्बिका पाल, एम वेंकेटेश्वर राव, मोहम्मद सलीम, पी भट्टाचार्य, सांबाजी छत्रपति, स्वप्न दासगुप्ता, चुनीभाई कांजीभाई गोहेल और कुमार केतकर ने हिस्सा लिया।

अब हम आपको थोड़ा भारतीय वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बारे में भारतीय इंटेलिजेन्स के अधिकारियों और पडोसी मुल्क पाकिस्तान के पक्ष को बताते हैं। एक उच्‍चपदस्‍थ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी देते हुए कहा की, इस ऑपरेशन में मदरसा तालीम-उल-कुरान के परिसर की 4 इमारतों को नुकसान पहुंचा। सूत्रों ने कहा कि इस समय तकनीकी इंटेजिलेंस की सीमाओं और ग्राउंड इंटेलिजेंस की कमी के चलते हमले में मारे गए आतंकियों का कोई भी आंकलन करना “पूरी तरह काल्‍पनिक” होगा। ध्यान रखने की बात यह है की यहाँ काल्‍पनिक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब हमे ये बिलकुल नहीं मालूम है की कितने आतंकी इस हमले से प्रभावित हुए है। वहीं पडोसी मुल्क ने भारत द्वारा उसके इलाके में हमले की पुष्टि तो की, मगर इससे साफ़ इनकार कर दिया है कि वहां कोई आतंकी कैंप थे या किसी तरह का नुकसान हुआ है।

अब इसमें ध्यान देने वाली यह बात है की एयर स्ट्राइक को लेकर संसदीय समिति और विदेश सचिव के बीच इतनी बातें तो हो गई, परन्तु ज्यादातर इस पूरे बातचीत में सिर्फ मंगलवार को भारतीय एयर फाॅर्स द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में ही बताया गया है। इस मामले में रक्षा मंत्रालय ने एयर स्ट्राइक के बारे में संसदीय समिति को कोई भी पुख्ता सबूत देने से इंकार कर दिया है।

आखिर क्यों विदेश सचिव इस मामले में पूरी तरह से सब कुछ सामने नहीं रख रहे। क्या सबूत सामने रखने से सच में राष्ट्र सुरक्षा को नुकसान पहुँचेगा या इसके पीछे कुछ और ही कारण है। क्या इसको छिपाने से हम अपने देश की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित कर लेंगे। राष्ट्र सुरक्षा की ऐसी ही बात थी तो पठनकोट में हुए हमले के बाद मौजूदा सरकार ने पाकिस्तान के सुरक्षा एजेंसी ISI को पठानकोट एयर बेस में छानबीन क्यों करने दिया। क्या उस दौरान राष्ट्रसुरक्षा मायने नहीं रखती थे। क्या हमारे देश की सुरक्षा इतनी कमजोर है की एयर फाॅर्स द्वारा की गई कार्रवाई से सम्बंधित चंद सबूत सामने रख देने से सुरक्षा को नुकसान पहुंच जायेगा।

मौजूदा सरकार तो देश की सुरक्षा से सम्बंधित बड़ी बड़ी बातें करते रहती है। तो क्या हम सरकार के इन बातो को सिर्फ जुमला ही समझे। देश की सुरक्षा को नुक्सान सिर्फ चंद सवालों के जवाब देने से नहीं पहुँचता, बल्कि सरकार की गलत नीतियों के कारण देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचता है।

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