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खेत में बकरी चराने गई दलित युवती से दुष्कर्म, गांव के लोगो ने भी नहीं दिया साथ

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घटना उन्नाव जिले की है जहा खेत में बकरी चराने गई एक दलित युवती को गाओं के ही एक युवक ने अपने हवस का शिकार बना लिया। बकरी चराने गई दलित युवती खेतो में काम भी कर रही थे तभी युवती ने अपने भाभी को आवाज़ लगाई। जिसकी आवाज़ सुनकर मौके पर एक गांव का युवक आ गया युवती ने उस युवक को कहा की मैंने तुम्हे आवाज़ नहीं दी है। मैंने अपनी भाभी को बुलाया है। लेकिन युवक ने उसकी एक न सुनी और युवती को उठाकर पास ही के सरसो के खेत में ले गया। युवक ने उस दलित युवती ने साथ तो पहले मारपिटाई करी और मुँह में कपड़ा ठूस कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

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शाम को जब युवती रोते रोते घर पहुची तोह उसने इस घटना के का ज़िक्र अपने माँ से किया। बिटिया ने साथ दुष्कर्म की घटना सुन कर मां भी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। दूसरे ही दिन दलित युवती अपनी माँ के साथ कोतवाली पहुँची। जहा पुलिस को उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस गांव के प्रधान को बुलाकर के आई और इस मामले की जानकारी प्राप्त करी। इसी बीच गांव के कुछ बिचोलियो ने युवक को बचाने के लिए सामने आ गए और उन्होंने एक कोरे कागज़ पर माँ बेटी के हस्ताक्षर ले लिए और उस कोरे कागज़ पर दोनों पक्षों के बीच समझौता लिखकर दलित युवती की माँ को पकड़ा दिया।

पीड़िता की मां पढ़ी लिखी नहीं थी। और गांव के लोगो ने भी उसका कोई साथ नहीं दिए उल्टा समझौता नामा दे दिया। जब पीड़िता क़ी मां ने देखा की आरोपी खुले आम गांव में घूम रहा है यह देखकर पीड़िता की माँ के इस पर उन्होंने कोतवाली में कोई लिखा पढ़ी के कागज ग्रामीणों को दिखाया। पढ़े लिखे ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि यह मुकदमा की तहरीर नहीं बल्कि समझौते का कागज है। यह सुनकर दुष्कर्म पीड़ित और उसकी मां के पैरों के तले जमीन खिसक गई।

कोतवाली से निराश दुश्मन पीड़िता और उसकी मां ने पुलिस अधीक्षक के दरबार में हाजिरी लगाई। पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कोतवाली प्रभारी को मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाही के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कोतवाली में मुकदमा तो पंजीकृत हो गया।

एक्स-रे से होगा उम्र का निर्धारण

अभी तक दलित युवती की सही उम्र का पता नहीं लग पाया है जिसके आधार पर आगे मुकदमा चलाया जायेगा जिसके लिए आगामी 10 दिसंबर को जिला अस्पताल एक्स-रे के लिए चले जाएगी जहां से उसकी उम्र का निर्धारण होगा। क्योंकि युवती का कोई स्कूल सर्टिफिकेट नहीं है। इसके पहले यूवती का मेडिकल और 161 का बयान हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ अभी भी गांव के बिचौलिए समझौता के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।


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