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3000 रू में बिक रहा है सर्वण आरक्षण, फ़र्ज़ी आरक्षण सर्टिफिकेट का भांडा फूटा

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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही मोदी सरकार ने सवर्णों को आरक्षण का ऐलान कर बड़ा दांव चल दिया था और इसका उन्हें बखूबी फ़ायदा भी मिला। साल 2019 की पहली कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए मोदी सरकार ने पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था कर डाली थी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जब संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हुए सवर्ण आरक्षण को लागू किया उस समय वंचित तबक़ों के प्रतिनिधियों समेत कई जानकारों ने मोदी सरकार की आलोचना भी करी और इसके लिए विरोध प्रदर्शन भी किए। सामान्य आरक्षण लागू करते समय भी आठ लाख रुपये की आय सीमा को लेकर ख़ासी चर्चा हुई थी। तब कई लोगों ने यह कहते हुए ईडब्ल्यूएस आरक्षण का विरोध किया था कि सालाना कम से कम आठ लाख रुपये कमाने वाले किसी परिवार का उम्मीदवार ग़रीब कैसे माना जा सकता है।  जबकि इतनी ही कमाई वाले ओबीसी उम्मीदवार को क्रीमीलेयर का बताया दिया जाता है। 

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अब सवर्ण आरक्षण लागू हो चूका है और इसकी घोषणा होते ही 10 प्रतिशत का लाभ लेने के लिए सदर अंचल कार्यालय में लम्बी -लम्बी कतार लग रही है। दलितों को आरक्षण का ज्ञान देने वाले सवर्ण अब आरक्षण के लिए लम्बी कतारों में लगे है। दस दिन में बनने वाले सवर्ण आरक्षण के प्रमाण पत्र के लिए अब महीनों लगने लगे है । इसे देख यहां दलाल भी सक्रिय हो गए। दलालों ने मुफ्त में बनने वाले इस प्रमाण पत्र की कीमत तीन हजार रुपए तय की है। कतार में लगे लोगों को यह खुलेआम दावा करते हैं कि रुपए खर्च कीजिए, दस दिन के बजाय पांच दिन में ही प्रमाण पत्र आपको दिलवा देंगे। आय और निवास प्रमाण पत्र भी हाथोंहाथ बनवा देंगे। सवर्ण आरक्षण प्रमाण पत्र बनाने में बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है। सूत्रों के अनुसार अधिकारी उन सवर्णो के भी प्रमाण पत्र बना रहे है जो इसके दायरे से बहार है। 

उद्धरण के तौर पर पटना जिलाधिकारी कार्यालय से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर सदर अंचल कार्यालय में हर दिन सवर्ण आरक्षण का प्रमाण पत्र बनने की लंबी कतार लगती है। सुबह से लेकर शाम तक लोग कतार में लगे रहते हैं फिर भी प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। कतार में लगे लोगों को सर्वर डाउन का बहाना बनाकर अगले दिन आने को कह दिया जा रहा था, वहीं दलाल हाथों हाथ काम करवाने के लिए खड़े रहते हैं। दलाल अब पैसे लेकर उन लोगो को भी प्रमाण पत्र बना रहे है जो इस आरक्षण से बहार है फ़र्ज़ी कगजो को तैयार कर बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है। 

पटना सदर अंचल कार्यालय के जनसेवा केंद्र में जाति, आय, निवास और सवर्ण आरक्षण के प्रमाण पत्र के साथ अन्य काम के लिए एजेंसी लगाई गई है। यहां सात काउंटर बनाए गए हैं। दाखिल खारिज से लेकर हर काम के लिए अलग-अलग काउंटर निर्धारित हैं। प्रमाण पत्र के आवेदन पत्र  परिसर में मिलते हैं। प्रमाण पत्र नि:शुल्क होता है और 10 कार्य दिवस के अंदर इसे जारी कर देना होता है, जबकि लोगों को कई सप्ताह बीतने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिल रहे हैं। कार्यालय के बहार सभी फ़र्ज़ी कागज़ो को बनाने के लिए पहले से ही रेट तय कर दिए गए है। सवर्ण आरक्षण प्रमाण के लिए तीन हज़ार, निवास और आय के लिए चार सौ रुपए और जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो तो ओबीसी वाले के लिए पांच सौ रुपए। इस धांधली के कारण आरक्षण के असली हक़दारो को आरक्षण न मिलकर पैसे वालो और अमीरो को फ़र्ज़ी कागज़ो के नाम दिया जा रहा है।


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